सुप्रीमकोर्ट ने संत ज्ञानेश्वर की हत्या की अपील को खारिज कर सोनू – मोनू को बड़ी राहत दी है।अगर ऐसा न हुआ होता तो मझधार में फंस जाता दोनों भाइयों का सियासी कैरियर।2006 में हुई थी सदा नंद उर्फ संत ज्ञानेश्वर की हत्याइलाहाबाद के हड़िया इलाके में संत ज्ञानेश्वर की हत्या 10 फरवरी 2006 में हुई थी। जिसमें ब्लॉक प्रमुख यश भद्र सिंह मोनू , तत्कालीन विधायक चंद्र भद्र सिंह सोनू सहित कई लोग नामजद हुए थे। संत ज्ञानेश्वर हत्याकांड के सोनू और मोनू को सत्र अदालत ने बरी कर दिया था। जिसके खिलाफ संत ज्ञानेश्वर के भाई इंद्र मणि तिवारी ने पहले हाई कोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट में अपील की। हाइकोर्ट के फैसले को सही मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी इंद्र मणि की अपील को खारिज कर दिया है।21 जनवरी 1999 में हुई थी इंद्र भद्र सिंह की हत्यापूर्व विधायक इंद्र भद्र सिंह की हत्या 21 जनवरी 1999 में सुल्तानपुर जिला मुख्यालय के दीवानी इलाके में बमों से हमला करके की गई थी। संत ज्ञानेश्वर में अपने चेलों से इंद्र भद्र सिंह की हत्या करवाई थी। इंद्र भद्र सिंह और संत ज्ञानेश्वर के बीच मामूली बात को लेकर विवाद शुरू हुआ था जिसमें संत ज्ञानेश्वर ने इतना खतरनाक फैसला ले लिया था। आश्रम की जमीन को लेकर शुरू हुआ था विवादसंत ज्ञानेश्वर और पूर्व विधायक इंद्र भद्र सिंह के बीच मामूली बात को लेकर विवाद शुरू हुआ था। साल था 1994 जब संत ज्ञानेश्वर मझवारा इलाके में अपना आश्रम बनवा रहे थे। मझवारा से सटा इंद्र भद्र सिंह का गॉव मायंग है ।बताया जाता है कि मझवारा के राम जस यादव की जमीन पर संत ज्ञानेश्वर जबराना कब्जा करना चाहते थे जिसको लेकर इंद्र भद्र सिंह और संत ज्ञानेश्वर आमने सामने आ गए।
यूपी – संत ज्ञानेश्वर हत्याकांड में पूर्व विधायक चंद्र भद्र सिंह सोनू और उनके ब्लॉक प्रमुख भाई यश भद्र सिंह मोनू को अभय दान मिल गया है

