निजी संस्था ने एलडीए की 40 हज़ार फाइलें गायब कर दी हैं। करीब 10 हज़ार फाइलें रद्दी पेपर की तरह रोल बनाकर एलडीए भेजी हैं। इससे बड़े पैमाने पर आवंटियों की फाइलें गायब और तितर-बितर हो गई हैं। अब इस मामले में एलडीए ने निजी संस्था को 82 लाख रुपए की रिकवरी की नोटिस भेजी है।परेशानी का सामना करना पड़ेगाएलडीए ने अपनी फाइलों के रखरखाव की जिम्मेदारी निजी संस्था पीएन राइटर्स को दी थी। वर्ष 2016 में तत्कालीन उपाध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने संस्था को इसकी जिम्मेदारी सौंपी थी। दावा किया गया था कि संस्था सभी फाइलों की स्कैनिंग कर उन्हें डिजिटल फार्म में कन्वर्ट करेगी। इसी के साथ यही संस्था मूल फाइलों को भी सुरक्षित रखेगी। इसके लिए संस्था ने ट्रांसपोर्ट नगर में अपना गोदाम भी बनाया था। लेकिन संस्था ने न फाइलें सुरक्षित रखीं और न ही स्कैनिंग हुई। स्थिति की जानकारी के बाद एलडीए ने संस्था से जब सभी फाइलें मांगी तो उसने 40 हज़ार फाइलें कम दीं। संस्था को कुल 1,45,449 फाइलें दी गई थीं। जो फाइलें उसने वापस की हैं उसमें करीब 10 हज़ार फाइलें रद्दी की तरह रोल में बनाकर एलडीए भेजी गई हैं। इस रोल में तमाम आवंटियों की फाइलों के पेपर हैं। किसी आवंटी की फाइल का पेपर किसी रोल में लगा है तो किसी का किसी दूसरे में। इससे इन आवंटियों की फाइलें बेतरतीब और अनुपयोगी हो गई हैं। इस मामले में एलडीए ने पूर्व में एफआईआर भी दर्ज कराई थी। इसके बावजूद फाइलों को नहीं खोजा जा सका है।एलडीए ने एनआईसी को 82 लाख वसूली के लिए भेजा पत्रनिजी संस्था को फाइलों के रखरखाव की जिम्मेदारी एनआईसी की सिफारिश पर दी गई थी। एनआईसी ने इसके लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण को पत्र लिखा था। प्राधिकरण ने संस्था को 82,09,160 रुपए दिया था। अब एलडीए के अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा ने इस रकम की रिकवरी का निर्देश दिया है। उन्होंने एनआईसी के जनरल मैनेजर हरि ओम शर्मा को पत्र लिखा है तथा यह रकम तत्काल एलडीए के खाते में वापस जमा कराने को कहा है।————————-फाइल न होने से करीब एक हजार लोगों की नहीं हो पा रही रजिस्ट्रीफाइलें न होने की वजह से करीब 1000 आवंटियों की रजिस्ट्री तथा दाखिल खारिज रुका हुआ है। एलडीए इनकी डुप्लीकेट फाइल नहीं खोल रहा है। जबकि इनकी मूल फाइलें प्राधिकरण से गायब हैं। लोग इसके लिए लगातार प्राधिकरण के अफसरों से गुहार लगा रहे हैं। जनता अदालत तथा प्राधिकरण दिवस में भी फरियाद कर रहे हैं। लेकिन इनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।पीएन राइटर्स ने 40 हज़ार फाइल नहीं दी हैं। जिसकी वजह से दिक्कतें हो रही हैं। संस्था को 82 लाख रुपए का भुगतान किया गया था। इसकी रिकवरी के लिए एनआईसी को पत्र लिखा गया है।ज्ञानेंद्र वर्मा, अपर सचिव, एलडीए————————पीएम राइटर्स के पास जो फाइलें थी उसने एलडीए को उपलब्ध करा दी हैं। फाइलें एलडीए में ही हैं और प्राधिकरण की अलमारियों से निकलती रही हैं। हमने एक लाख से ज्यादा फाइलें एलडीए को वापस की हैं। एलडीए का आरोप निराधार है।मनीष नहाटा, इंचार्ज, पीएन राइटर
लखनऊ -एलडीए की 40 हज़ार फाइलें गायब

