संवाददाताअमेठी : बिकास खंड शुकुल बाजार जगदीशपुर के अंतर्गत रानीगंज वारिसगंज कमरौली महोना शुकुल बाजार ठाकुरगंज जैनम गंज सहित विभिन्न गांवों में नवरात्रि का पर्व हर्षो उल्लास के साथ मनाया जा रहा है।जहाँ तमाम श्रद्धालु माता के दरबार में अपनी उपस्थिति दर्ज करते हुए माता के दर्शन कर पूजा अर्चना कर रहे हैं ।चैत्र नवरात्रि के इस पावन अवसर पर माता के नौ रूपों की विधि- विधान से पूजा- अर्चना की जाती है इसी क्रम में चौथे दिन माता के चौथे स्वरूप माता कुष्मांडा की पूजा की गयी । माता के इस रूप की पूजा का इस दिन बड़ा महत्व है। ऐसा माना जाता है कि देवी के हाथ में जो अमृत कलश होता है उससे वह अपने भक्तों को दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करती हैं। माता कुष्मांडा के बारे में यह भी मान्यता है कि वह सिंह की सवारी करती हैं जो धर्म का प्रतीक है। विधि-विधान से पूजा करने के बाद माता कुष्मांडा के मंत्रों का जाप किया जाए तो वह बहुत प्रसन्न होती है और भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करती हैं। माता की अष्ट भुजाएं हैं जो जीवन में कर्म करने का संदेश देती हैं तथा उनकी मुस्कान हमें यह बताती है कि हमें हर परिस्थिति का हंसकर ही सामना करना चाहिए। माता की हंसी और ब्रह्माण्ड को उत्पन्न करने के कारण ही इन्हें कुष्मांडा देवी कहा जाता है। जिस समय सृष्टि नहीं थी। चारों और अंधकार ही अंधकार था तब देवी ने अपनी हंसी से ही ब्राह्माण्ड की रचना की थी इसलिए यही सृष्टि की आदि-स्वरूपा आदि शक्ति हैं। माता के सात हाथों में कमण्डल, धनुष बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं तथा आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है। माता कुष्मांडा की पूजा अर्चना से सभी प्रकार के रोग और परेशानियां समाप्त हो जाती हैं माता के इस स्वरूप की पूजा से आयु, यश, बल, और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है ।
अमेठी -आदिशक्ति के मंदिर में भक्तों की लगी कतार

