प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रविवार को कहा है कि श्रमिक मजदूर नहीं कलाकार हैं, कारीगर हैं। श्रमिक जिस हुनर से सज्जा और निर्माण का कार्य करते हैं, उसकी शिक्षा उन्हें स्कूलों से नहीं अपितु पीढ़ी दर पीढ़ी कार्य करते हुए मिलती है। श्रमिकों के लिए ऐसे शिविर अक्सर लगाने चाहिए।राज्यपाल राजभवन में मई दिवस के अवसर पर श्रमिकों के सम्मान में आयोजित श्रमिक सुविधा शिविर में पहुंचे श्रमिकों को संबोधित कर रही थीं।आनंदीबेन पटेल ने कहा कि श्रमिक समाज का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने समारोह में संत रविदास शिक्षा सहायता योजना एवं साइकिल सहायता योजना के तहत 9, 10, 11 और 12वीं कक्षा उत्तीर्ण 13 बच्चों को साइकिल, कक्षा-12 उत्तीर्ण 2 बच्चों को रुपये 6 हजार का चेक, प्रधानमंत्री स्वनिधी योजना के तहत डेयरी के लिए एक लाभार्थी को 10 लाख रुपये और मत्स्य पालन के लिए एक लाभार्थी को 50 हजार रुपये का किसान क्रेडिट कार्ड, निराश्रित महिला पेंशन के एक लाभार्थी, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के एक लाभार्थी, राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के दो लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र प्रदान किए।राज्यपाल ने समारोह में विशेष रूप से प्रति श्रमिक परिवार एक साड़ी का वितरण किया गया। राज्यपाल ने मंच से स्वयं 11 श्रमिक महिलाओं को साड़ी प्रदान की। राज्यपाल के विशेष प्रयास से ये साड़ियां गुजरात से मंगवाई गई थीं।, जिन्हें नगर पंचायत मोहनलालगंज के 100, अमेठी के 40, गोइसाईगंज के 45 और नगर निगम के 590 श्रमिकों को वितरित किया गया।उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने इस शिविर आयोजन को अद्भुत बताते हुए कहा कि राजभवन से राजसत्ता नहीं जनसत्ता संचालित हो रही है। श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि शिविर आयोजन में राज्यपाल की श्रमिकों के प्रति सम्मान की सोच निहित है। जिलाधिकारी लखनऊ अभिषेक प्रकाश ने शिविर के सम्पूर्ण आयोजन में उपलब्ध कराई गई व्यवस्थाओं और श्रमिकों के लिए सुविधाओं की जानकारी दी। निदेशक एसजीपीजीआई प्रो. डा. आर.के.धीमान ने महिलाओं को स्तन कैंसर के बारे में जागरूक किया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव राज्यपाल महेश कुमार गुप्ता, विशेष सचिव राज्यपाल, नगर आयुक्त अजय द्विवेदी, राजभवन के अधिकारीगण, लखनऊ के सीडीओ तथा उपजिलाधिकारीगण, समस्त संबंधित विभागों के अधिकारी तथा नगर निगम एवं नगर पंचायतों से आए श्रमिक उपस्थित थे।
लखनऊ -श्रमिक समाज का अभिन्न अंग-श्रमिक मजदूर नहीं कलाकार होते हैं- आनंदी बेन

