हरदोई। जो हाथ कभी अपराध के लिए उठते थे वही आज जेल में रहकर जिले का नाम रोशन कर रहे हैं। हरदोई जिला कारागार में कैदी कई प्रकार की हरी सब्जियां उगा रहे हैं। यहाँ पर जैविक खेती कर सब्ज़ीयों की फसल का अच्छा उत्पादन किया जा रहा है, 16 किलो का कद्दू उगाकर हरदोई जिला कारागार सुर्खियों में आ गया है।बंदियों और कैदियों को आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी बनाये जाने के लिए जेल परिसर के अंदर स्थित कृषि फार्म में हरी सब्जियों की खेती की जा रही है। जेल में यहां उगाई गयी सब्ज़ियां ही पकायी जाती हैं। इस साल बंदियों की मेहनत से आलू अधिक मात्रा में पैदा हुआ, जिसको इस्तेमाल करने के अलावा कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित रखवा गया है।ऑर्गेनिक खेती कर संभाल रहे अपनी सेहतकारागार में बन्द कैदियों का स्वास्थ्य अच्छा रहे, उन्हें ताज़ी हरी सब्जियां मिल सकें, इसके लिए जिला जेल परिसर में बन्द कृषि फार्म में ही ऑर्गेनिक खेती कराई जा रही है। जेल आने से पहले खेतीबाड़ी करने वाले बंदियों को खेती करने की ज़िम्मेदारी दी गयी है।तीन एकड़ कृषि फार्म में खेतीजिला कारागार में लगभग तीन एकड़ का कृषि फार्म है जिसमें ढाई एकड़ में बाहर व आधे एकड़ में अंदर खेती होती है। ढाई एकड़ में इस समय भिंडी, तोरई, लौकी पालक, अरबी, बैगन, कद्दू का उत्पादन हो रहा है, पिछले वर्ष इस ढाई एकड़ में आलू की फसल की गयी थी।450 कुंतल पैदा हुआ था आलूकारागार के कृषि फार्म में पिछले वर्ष 450 कुंतल आलू का रिकार्ड उत्पादन हुआ था, जो कि कैदियों को खाने के साथ साथ कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित रखवा दिया गया है।इस तरह से श्रम के बदले मिलता रुपयाकृषि फार्म में कार्य करने के एवज में सरकार कुशल कैदियों को 40 रुपये, अर्धकुशल 35 व अकुशल को 25 रुपये प्रतिदिन देती है, साथ ही उन्हें खाने के लिए गुड़ आदि दिया जाता है।जेलर संजय सिंह ने बताया कि हरी सब्जियों के हिसाब से फार्म हाउस को टुकड़ों में बांटा गया है। कैदियों को बाहर से प्रशिक्षण दिलवाया गया है जिसके बाद उनकी इच्छा के अनुसार हरी सब्जियां उगाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि इसमें कोई केमिकल और किसी फर्टिलाइजर का उपयोग नहीं किया जाता है। जेल के कृषि फार्म से ही कैदियों के लिए सब्जियां उपलब्ध कराई जाती हैं।
हरदोई – अपराध से सने हाथों में फावड़ा, उगा रहे सब्जियां

