लखनऊ – महिलाओं को जरूरत आज तारीख मिल रही तीन दिन बाद

by | May 9, 2022 | अपराध, ई पेपर, जनहित, नेशनल, बड़ी खबर, राजनीती, स्थापना और प्रेरणा | 0 comments

राजधानी के सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए बड़ी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। ओपीडी में गर्भवती महिलाओं और ट्यूमर आदि की पहचान के लिए अल्ट्रासाउण्ड की तारीख तीन से चार दिन बाद दी जा रही हैं। शहर के प्रमुख महिला अस्पताल डफरिन, झलकारीबाई अस्पताल ही नहीं, शहर समेत ग्रामीण इलाकों में संचालित अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों का यही हाल है। जननी सुरक्षा योजना के तहत महिलाओं को सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड का प्रावधान है, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की भारी कमी से अल्ट्रासाउण्ड तय तारीख पर नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में महिलाएं बाहर निजी सेंटरों से महंगे दामों पर जांच कराने के लिए मजबूर हैं।एक रेडियोलॉजिस्ट पर दो अस्पतालों का जिम्माशहर और ग्रामीण क्षेत्र की 17 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर प्रसव की सुविधा है। यहां अल्ट्रासाउण्ड सुविधा है लेकिन रेडियोलॉजिस्ट सिर्फ 10 हैं। एक डॉक्टर पर दो अस्पतालों की जिम्मेदारी है। वह एक दिन एक सीएचसी तो दूसरे दिन दूसरी सीएचसी जाकर जांच कर रहे हैं। इसके चलते गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए तारीखें देनी पड़ रही हैं। महिला अस्पतालों की इमरजेंसी में अल्ट्रासाउण्ड की सुविधा नहीं है। दिन में रेडियोलॉजिस्ट मिल जाते हैं लेकिन रात या छुट्टी वाले दिन किसी को जांच करानी है तो बाहर के सेंटरों से जांच कराना ही विकल्प बचता है।आपबीतीआपबीती-1आठ माह की गर्भवती गोलागंज निवासी तरन्नुम पेट दर्द पर डफरिन की ओपीडी पहुंचीं। वहां डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने अल्ट्रासाउण्ड कराने के लिए लिखा मगर जब वे जांच के लिए पहुंचीं तो काउंटर पर मौजूद कर्मी ने तीन दिन बाद तारीख थमा दी। मजबूरन परिजनों ने निजी सेंटर में महंगे दाम पर जांच कराई।आपबीती-2तेलीबाग निवासी रजनी हजरतगंज स्थित झलकारीबाई अस्पताल में छह माह से इलाज करा रही हैं। डॉक्टर को दिखाने पर अल्ट्रासाउण्ड की सलाह दी गई। वे अल्ट्रासाउण्ड कराने पहुंची तो दो दिन बाद की तारीख बता दी गई।वर्जनअस्पतालों में प्राथमिकता से गर्भवती, दूसरी महिलाओं अल्ट्रासाउण्ड हो रहा है। रेडियोलॉजिस्ट के खाली पदों पर जल्द भर्ती की जाएगी।-डॉ. मनोज अग्रवाल, सीएमओ