लखनऊ बेंच ने चार बेटियों और बीवी के हत्यारे की फांसी बरकरार

by | May 11, 2022 | अपराध, ई पेपर, जनहित, नेशनल, बड़ी खबर, राजनीती, स्थापना और प्रेरणा | 0 comments

संवाददाता लखनऊ :हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने चार बेटियों और बीवी की हत्या के अभियुक्त को सत्र अदालत की ओर से दी गई फांसी की सजा बरकरार रखी है। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की कि अभियुक्त ने जिस बर्बरता से घटना को अंजाम दिया है, उसे आजीवन कारावास की सजा देना पर्याप्त नहीं होगा। कोर्ट ने उसे समाज के लिए खतरा बताते हुए उसके कृत्य को दुर्लभ से दुर्लभतम करार दिया।न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने अपनी तल्ख टिप्पणी के साथ अभियुक्त दीन दयाल तिवारी की अपील खारिज कर दी। शासकीय अधिवक्ता विमल श्रीवास्तव और अपर शासकीय अधिवक्ता चंद्रशेखर पांडेय ने दलील दी कि घटना अयोध्या जिले के पुराकलंदर थाना क्षेत्र की है। दीन दयाल तिवारी के भाई दीनानाथ ने दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि 12/11 नवम्बर 2011 की रात करीब ढाई बजे पड़ोस में रहने वाले भाई के घर से बचाओ-बचाओ का शोर सुनाई दिया। शोर सुनकर दीनानाथ और उनकी पत्नी भाग कर वहां पहुंचे तो दरवाजा अंदर से बंद था। अभियुक्त दरवाजा खोलने को तैयार नहीं हुआ तो दीनानाथ ने कहा कि वह दरवाजा तोड़ देगा। तब अभियुक्त कुल्हाड़ी लेकर उन दोनों पर भी हमलावर हो गया। इतने में शोर सुनकर गांव के अन्य लोग भी आ गए। सबने मिलकर दीनदयाल पर काबू पाया। सूचना पर पुलिस भी मौके पर आ गई और अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया गया।पत्नी पर शक के चलते कर दी हत्याअभियोजन पक्ष के मुताबिक अभियुक्त को पत्नी के चरित्र पर शक था। वह लखनऊ में रहकर काम करता था और उसे लगता था कि उसकी पत्नी का गांव के किसी व्यक्ति से अवैध सम्बंध है। इसके कारण से उसने 36 वर्षीय पत्नी सियालाली समेत 11, आठ, छह और चार साल की बेटियों की कुल्हाड़ी और चाकू से हत्या कर दी।भाई पर मढ़ा आरोपअभियुक्त दीनदयाल ने बयान में खुद को निर्दोष बताते हुए झूठा फंसाए जाने की दलील दी। उसने वादी भाई दीनानाथ तिवारी पर ही उल्टा आरोप लगाया था कि उसके चार बेटियां थीं, जबकि उसके भाई को बेटा था। वह अपनी सभी सम्पत्ति बेटियों के नाम कर देता और यही बात भाई को पसंद नहीं थी। उसने कहा था कि उसे विश्वास है कि घटना को भाई और गांव के कुछ लोगों ने अपराधियों की मदद से अंजाम दिलवाया है। हालांकि, न्यायालय ने कहा कि अपने इस बयान को सिद्ध करने का भार अभियुक्त पर था लेकिन वह असफल रहा है