रोजगार देने की गारंटी वाली मनरेगा हाल फिलहाल कमीशनबाजी की गारंटी दे रही है। चकरोड, गूल सफाई जैसे कच्चे कार्यों पर कुल श्रमांश का पांच फीसदी और पक्के कार्यों पर सामग्री व श्रमांश के इस्टीमेट का दो फीसदी अतिरिक्त कमीशन देने के बाद ही काम की गारंटी दी जा रही है।ताजा मामला भरावन ब्लॉक का है। यहां के चार ग्राम प्रधानों ने एपीओ पर एडवांस दो फीसदी कमीशन मांगने का आरोप लगाया है। कमीशन न देने पर पक्के कार्य की स्वीकृति न देने का आरोप भी लगाया है। भरावन ब्लॉक की ग्राम पंचायत जगसरा, लालामऊ, सहगवां व ग्राम पंचायत बम्हनौआ पेंग के ग्राम प्रधानों ने सीडीओ आकांक्षा राना से मुलाकात कर एपीओ पर कमीशन मांगने के आरोप लगाए हैं। ग्राम प्रधानों ने कहा कमीशन न देने पर उनकी ग्राम पंचायतों के इस्टीमेट बने रखे रहे पर उन्हे कार्य की स्वीकृति नहीं दी गई। वित्तीय वर्ष समाप्त होने के कारण उनके इस्टीमेट भी खराब हो गए। बताया उनकी ग्राम पंचायतों में कच्चे व पक्के कार्यों का निर्धारित रेशियों भी ठीक था। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीडीओ ने एपीओ दीपक गुप्ता से स्पष्टीकरण तलब किया है। नाराजगी जताते हुए कमीशन मांगे जाने के मामले की सत्यता की जानकारी चाही है।इस्टीमेट बनवाए जाने के बावजूद स्वीकृति न दिए जाने का कारण भी स्पष्ट करने को कहा है। सीडीओ ने बीडीओ व एपीओ को जनप्रतिनिधियों से समन्वय स्थापित करने व कार्य सुचारु रूप से करवाए जाने के निर्देश दिए हैं। सीडीओ ने मनरेगा से जुड़े सभी जिम्मेदारों को चेतावनी देते हुए मनरेगा में किसी तरह की कोताही न करने व शासन के निर्देशों के अनुसार मनरेगा कार्य करवाए जाने के निर्देश दिए हैं।कार्यक्रम अधिकारियों पर लगते रहे हैं आरोपब्लॉकों पर मनरेगा की जिम्मेदारी कार्यक्रम अधिकारियों के जिम्मे है। बीडीओ सभी ग्राम पंचायतों में सामग्री व श्रमांश के निर्धारित किए गए 40:60 अनुपात को मेनटेन करते हुए विकास कार्य करवाते हैं। पर ब्लॉक स्तर पर रेशियों मेनटेन करने की छूट के चलते अधिकांश बीडीओ पर चहेतों को निर्धारित कमीशन लेने के बाद कार्य की अनुमति देने के आरोप लगते रहते हैं।
हरदोई -रोजगार की गारंटी देने वाली मनरेगा-कमीशन देने के बाद ही मनरेगा में होते पक्के कार्य

