वाराणसी में ज्ञानवापी मामले में एक और याचिका, मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक की कोर्ट से मांग

by | May 25, 2022 | अपराध, ई पेपर, जनहित, नेशनल, बड़ी खबर, राजनीती, स्थापना और प्रेरणा | 0 comments

ज्ञानवापी प्रकरण में वादी राखी सिंह के चाचा जितेंद्र सिंह बिसेन की पत्नी किरण सिंह ने मंगलवार को सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर की अदालत में एक अर्जी दाखिल की। इसमें परिसर में मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की गई है। अदालत ने अर्जी स्वीकार कर ली है। उस पर बुधवार को सुनवाई होगी। याची किरण सिंह विश्व वैदिक सनातन संघ की अंतरराष्ट्रीय महामंत्री जबकि उनके पति जितेंद्र बिसेन अध्यक्ष हैं। आदिविश्वेश्वर की वाद मित्र किरण सिंह और वादी विकास साह व विद्याचंद ने मंगलवार को 80 पेज, 120 पैरा में तीन बिंदुओं पर अदालत आवेदन दिया है। शिवम गौड़, मानबहादुर सिंह आदि अधिवक्ताओं की ओर से दायर याचिका में मांग की गई है कि मुस्लिम पक्ष को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में प्रवेश के लिए प्रतिबंधित किया जाय, ज्ञानवापी परिसर हिन्दुओं को पूजा-पाठ करने के लिए सौंप देने का आदेश दें।पहले मुस्लिम पक्ष की मांग पर होगी सुनवाई, 26 मई की तारीख इसके साथ ही तत्काल प्रभाव से भगवान् आदि विश्वेश्वर की प्रतिदिन पूजा-अर्चना प्रारम्भ कराई जाए। उन्होंने कोर्ट कमीशन कार्यवाही की रिपोर्ट की भी दलीलें दीं। अदालत ने शाम चार बजे याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली। बुधवार को सुनवाई होगी। विकास साह व विद्याचंद वाराणसी के ही निवासी हैं। नोटिस देने के लिए कोर्ट ने वादी को निर्देशित किया बहस के दौरान प्रतिवादी जिला शासकीय अधिवक्ता महेंद्र प्रसाद पांडेय ने बिना नोटिस दिये ही वाद दाखिल करने पर विरोध जताया। उन्होंने कहा कि वादी को कम से कम सभी प्रतिवादियों को वाद के संदर्भ में नोटिस जारी कर सूचित करना चाहिए था। अदालत ने वाद को दर्ज करते हुए वादी को धारा-80 के तहत सभी पक्षकारों को नोटिस देने के लिए वादी को निर्देशित किया। सुप्रीम कोर्ट में एक नयी याचिका दाखिल कर ज्ञानवापी मस्जिद विवाद में हस्तक्षेप का अनुरोध किया गया है। इसमें दलील दी गयी है कि मुसलमान किसी भूखंड पर मस्जिद का दावा करते हुए कोई अधिकार नहीं जता सकते, जब तक कि इसका निर्माण कानूनी रूप से स्वामित्व और नियंत्रण वाली पवित्र जमीन पर नहीं किया गया हो।याचिकाकर्ता ने कहा कि देवों में निहित संपत्ति देवों की होती है, भले ही किसी व्यक्ति ने उस पर अवैध कब्जा किया हो और उस पर नमाज अदा की जा रही हो। वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे के माध्यम से दाखिल याचिका में कहा कि केवल उन्हीं जगहों को संरक्षित किया जा सकता है, जिन्हें उन्हें बनाने वाले व्यक्ति के पर्सनल लॉ के अनुरूप बनाया गया है, लेकिन पर्सनल लॉ की अवज्ञा करते हुए निर्मित स्थानों को 'उपासना स्थल' नहीं कहा जा सकता।याचिका में कहा गया है कि मस्जिद का दर्जा केवल उन्हीं ढांचों को दिया जा सकता है जो इस्लाम के सिद्धांतों के अनुसार बनाए गए हैं और इस्लामी कानून में निहित प्रावधानों के खिलाफ बनाई गई मस्जिदों को मस्जिद नहीं कहा जा सकता। ज्ञानवापी मस्जिद की प्रबंधन समिति अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद ने परिसर के सर्वेक्षण पर रोक लगाने के लिए शीर्ष अदालत का रुख किया था।शीर्ष अदालत ने 20 मई को ज्ञानवापी मस्जिद पर हिंदू भक्तों द्वारा दायर दीवानी मुकदमे को दीवानी न्यायाधीश (वरिष्ठ संभाग) से जिला न्यायाधीश, वाराणसी को यह कहते हुए स्थानांतरित कर दिया था कि इस मुद्दे की जटिलताओं और संवेदनशीलता को देखते हुए, यह बेहतर है कि एक वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी इस मामले को देखे जिसे 25-30 वर्षों से अधिक का अनुभव हो।