ओंकार नाथ चौधरी : एक नारी को शिक्षित करने का अर्थ दो परिवार को शिक्षित करना -: श्री मृत्युंजय श्रीवास्तव सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रावस्तीजनपद श्रावस्ती विधिक जागरूकता/ साक्षरता शिविर काआयोजन स्थान-बी०आर0सी० भिनगा जनपद श्रावस्ती में किया गया जिसमें ब्लाक-सिरसिया एवं गिलौला के प्रशिक्षणरत स्वयंसहायता समूह कीमहिलाओं की निःशुल्क विधिक सहायता, महिला अधिकार तथा अन्य कानूनी जानकारी प्रदान की गयी ।उक्त कार्यक्रम मे श्री मृत्युंजय श्रीवास्तव सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, श्रावस्ती ने प्रशिक्षणकर्मियों को बताया कि एक नारीको शिक्षित करने का अर्थ दो परिवार को शिक्षित करना है। वर्तमान युग को वैचारिकता का युग कहा जा सकता है। अगर स्त्री या माता अथवागृहिणी के संस्कार शिक्षा- दीक्षा आदि उत्तम नहीं होगी तो वह समाज और राष्ट्र को श्रेष्্ सदस्य कैसे दे सकती है। समाज के लिए स्त्री कास्वस्थ, खुशहाल, शिक्षित, समझदार, व्यवहार कुशल, बुद्धिमान होना जरूरी है और वह शिक्षा से ही सम्भव है।कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता श्री विष्णुदत्त अस्थाना ने महिला अधिकार एवं अन्य कानूनी जानकारी प्रदान करते हुए कहा कि महिलाओं केसशक्तिकरण में सहायक है या शिक्षा का क्या महत्व है। किसी महिला को सृूरज ड्बनें के बाद और सूरज उगने से पहले गिरफ्तार नहीं किया जासकता, किसी खास मामले में एक प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रट पर यह संभव है। तथा हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत नये नियमों के आधारपर पुश्तैनी सम्पत्ति पर महिला और पुरूष दोनों का बराबर हक हैअध्ययन में यह समझने का प्रयास किया गया कि ये कौन-कौन सी बाधाएं हैं जिनके कारण महिलाएं शिक्षा ग्रहण नहीं कर पा रही हैं। उन्होंनेबताया कि लैंगिक भेदभाव, पारिवारिक परम्पराएं, परदाप्रथा, बाल, निर्धनता अदि महिला शिक्षा में बाधाएं हैं। तेजी से बदलती हुई विश्व कीवास्तविकताओं को समझने के लिए आवश्यक विष्लेशणात्मक कौशल प्राप्त होगा जो उन्हें अपमान पूर्ण और मानवीय स्थितियों का विरोध करने काविश्वास और ताकत प्रदान करेगा।शिक्षा के द्वारा ही महिलाओं का सशक्तिकरण सम्भव है। इसलिए प्रस्त्तउक्त कार्यकरम में प्रेम कुमार सिंह प्रशिक्षण अधिकारी, लखनऊ, शिवराम, कम्यूटर ऑपरेटर, किरन देवी, ज्योती उपाध्याय, गीता देवी, सुन्दरीदेवी, नीत, नीता देवी, संगीता, जावित्री देवी आदि प्रशिक्षणकर्मी उपस्थित रही।
बलरामपुर – एक नारी को शिक्षित करने का अर्थ दो परिवारों को शिक्षित करना -मृत्युंजय श्रीवास्तव

