कानून के सभी मंदिरों से टूटी आश नहीं मिल पा रहा बेबस लाचार महिला को न्याय क्या अब आत्म हत्या ही अंतिम विकल्प।ऐसा ही मामला ठाकुर गंज लखनऊ का है पीड़िता लक्ष्मी श्रीवास्तव का विवाह 4 मई 1998मे राजेंद्र कुमार के साथ हुआ था जो शादी के बाद परिवार वालों के साथ मकान नंबर 417/289में रह रही थी जो नया नंबर 417/1224 हो गया है जॉइंट फैमिली के साथ अपना जीवन गुजार रही थी शादी के कुछ दिनों के बाद आए दिन शादी में मिले हुए सामान कपड़े जेवर आदि को लेकर परेशान और बेइज्जत किया जाने लगा। साथ ही गाली गलौज जहां तक रिश्तेदारों को भी नहीं बख्शा । कुछ समय बाद पहला बच्चा लड़की होने पर पति ने मार देने को कहा इनकार करने पर जीवन बर्बाद करने की धमकियां दी मारपीट करने लगा परेशान करने की किसी प्रकार की कोई कसर नहीं छोड़ी बेटी के इलाज के लिए पैसे भी नहीं देता था मायके वालों का सहारा लेकर जीवन व्यतीत करती रही आए दिन पति गाली गलौज घर वालों के सामने साथ मिलकर अभद्रता करता रहा कभी-कभी गला भी दबा दिया करता था घर में कोचिंग सेंटर चलाता था जिसमें कुछ अन्य टीचर भी आते थे कोचिंग सेंटर इंटर तक थी किसी प्रकार मायके वालों का सहारा ले जीवन व्यतीत किया ससुराल पक्ष के पति समेत सभी ने मिलकर परेशान करने की हद नहीं छोड़ी कुछ समय बाद दूसरा बच्चा बेटा हुआ फिर भी अस्पताल का बिल तक नहीं दिया मामला इतना बढ़ गया कि घर से निकाल दिया घर की पूरी सप्ताह बड़े भाई राजेश और राकेश के हाथ। कोचिंग सेंटर के आड़ में राजेंद्र कुमार अवैध काम भी कर रहे थे पीड़िता लक्ष्मी श्रीवास्तव को घर से बेघर कर दिया कुछ दिन ससुर ने कमरा दिला दिया रहने को फिर बुरी हालत देख पास बुला लिया मकान के बिल का भुगतान ससुर करते थे 2011 में पति ने एक षड्यंत्र के चलते प्लानिंग की प्लानिंग के मुताबिक मोहल्ले वालों को बुलाकर साथ मिल घर में मारने के लिए घुसे सबके खिलाफ थाने में एप्लीकेशन देने के बाद बहुत ही मुश्किल हो में एफ आई आर दर्ज हुई पर पति के बयान के आधार पर रख हो गई तीन बार फाइनल रिपोर्ट लगने पर चौथी बार कंप्लेंट 554/11 दर्ज हुई। जिसमें मिलीभगत के चलते बहुत खेल हुए आज भी केस पेंडिंग है पति के सड़कों पर गालियां देना मारना पीटना और पति के बयान पर फाइनल रिपोर्ट का खुलासा होने पर 2013मे 41/13,12 घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत केस दर्ज हुआ 2013 में ससुर की जनवरी में डेथ हो गई 2013 से कंप्लेंट केस में 5000 अंतरिम बंधा पर पति को जानकारी होने पर भी कोर्ट नहीं प्रजेंट हुए लक्ष्मी श्रीवास्तव लायर की प्रैक्टिस कर रही थी कोर्ट से काफी बार ऑर्डर हुए पर मेंटेनेंस भूतान नहीं किया पीड़िता को जहां तक करंट लगाकर मारने की भी कोशिश की गई उसके बाद पीड़िता ने डिवोर्स फाइनल करा लिया आज पीड़िता की वह स्थिति है भूखों मरने की कगार पर झूल रही है बच्चों के साथ सभी न्याय के मंदिरों में दस्तक देने के बाद कहीं से न्याय की आस नहीं है जहां तक बिजली भी काट दी गई पुनः मीटर के लिए अप्लाई करने पर बिल का हवाला देते हुए अधिकारियों ने कोई सुनवाई नहीं की जबकि बकाया बिल नामित व्यक्ति की रसीद भी नहीं काटी गई मीटर भी बिजली विभाग ले गया कहीं से किसी प्रकार की सुनवाई ना होने के कारण लक्ष्मी श्रीवास्तव बेहद परेशान हैं कठिन समस्याओं के बीच बच्चों के पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए काफी परेशानी का सामना उठाते हुए कहीं भी दूर दूर तक किसी भी न्याय के मंदिर में सुनवाई नहीं हो रही है जिसके चलते क्या उनका आत्महत्या की अंतिम विकल्प है योगी सरकार में महिलाओं को क्या इसी तरह सम्मान दिया जाएगा कृपया सरकार इस मामले पर संज्ञान ले।
लखनऊ -न्याय यह कैसा कानून का अन्याय महिला क्या आत्म हत्या अंतिम विकल्प

