*चौरेबाजार में जनसेवा केंद्रो पर चोरी-छिपे।
चौरेबाजारअयोध्या
वर्तमान समय में पहचान के लिए सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में उपयोग होने वाला आधार कार्ड कायदे-कानूनों को धता बताते हुए बैंक ऑफ बड़ौदा चौरे बाजार के निकट एक जनसेवा केंद्र पर चोरी-छिपे बनाया जा रहा है। अब ये कार्ड सही हैं अथवा फर्जी यह तो जांच का विषय है, लेकिन इसे बनवाने वालों को जेब ढीली करनी पड़ रही है।₹300 प्रति कार्ड के हिसाब से वसूला जा रहा है। वर्तमान में आधार कार्ड हर नागरिक की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है। बैंक में खाता खोलने से लेकर किसी भी सरकारी/गैरसरकारी योजना का लाभ उठाने के लिए आधार अनिवार्य है। यहां तक कि बच्चों के एडमिशन, फीस में छूट, आय-जाति प्रमाणपत्र व राशनकार्ड आदि में भी यह एक अहम दस्तावेज है। पहले आधार कार्ड बनाने की जिम्मेदारी निजी एजेंसियों के हवाले थी, लेकिन लगातार बढ़ रही शिकायतों व फर्जीवाड़े को देखते हुए इसको बनाने की जिम्मेदारी चुनिदा डाकघरों व बैंक शाखाओं को दे दी गई। बताते चलें कि भारत सरकार की ओर से आधार कार्ड बनाए जाने हेतु पहले जनसेवा केंद्रों को अधिकृत किया गया था किंतु तमाम शिकायतों के बाद सरकार ने नियम कानून सख्त कर दिए और आधार कार्ड बनाए जाने की जिम्मेदारी जनसेवा केंद्रों से हटाते हुए पोस्ट ऑफिस एवं उच्च राष्ट्रीय कृत बैंकों को सौंप दिया था। अब ऐसे में चौरेबाजार चौकी क्षेत्र से चंद कदम दूरी पर स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा के निकट जन सेवा केंद्र चलाने वाले को आखिर आधार कार्ड बनाने के लिए अधिकृत किसके द्वारा किया गया है। उसके पीछे किस बैंक कर्मी, शिक्षा विभाग अथवा पोस्ट ऑफिस के जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी का हाथ है। इसका खुलासा स्थानीय एक शिकायतकर्ता द्वारा अपने बेटे एवंं पुत्री के आधार कार्ड में संशोधन कराए जाने के नाम 600 सौ रुपए की अवैध वसूली जनसेवा केंद्र संचालक द्वारा किए जाने के बाद हुआ। जबकि सरकार की ओर से आधार कार्ड संशोधन के लिए मात्र 50 रुपए का शुल्क निर्धारित किया गया है। आधार कार्ड बनाए जाने की आड़़ में अनाधिकृत रूप से जन सेवा केंद संचालक द्वारा जरूरतमंद भोले-भाले ग्रामीणों की जेब पर डाका डाला जा रहा था। अब मामले में सबसे अहम पहलू तो यह है कि जब समूचे प्रदेश में जन सेवा केंद्र पर आधार कार्ड बनाए जाने का काम पूरी तरह से रोक दिया गया। तब ऐसे में उक्त जन सेवा केंद्र संचालक द्वारा आधार कार्ड आखिर किस अधिकार और आदेश के तहत बनाया जा रहा है और जनसेवा केंद्र संचालक को आधार कार्ड बनाए जाने हेतु सरकार की ओर से जारी पासवर्ड एवं आईडी कहां से मिली। आदि सब अनसुलझे सवाल अब ग्रामीणों के जेहन में कौंध रहे हैं। फिलहाल इस अवैध वसूली में संलिप्त जन सेवा केंद्र संचालक की करतूतों का बाजार समूचे क्षेत्र में पूरी तरह से गर्म हो गया था। जिसके मनमानी रवैया एवं धोखाधड़ी का खामियाजा महामारी का संकट झेल रहे पीड़ित एवं परेशान ग्रामीणों को झेलना पड़ रहा है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार पता चला है कि जनसेवा केंद्र संचालक पड़ोसी जनपद सुल्तानपुर के धनपतगंज से आता है जहां से उसने भोले-भाले ग्रामीणों को ठगी का शिकार बनाने के लिए किसी बैंक या शिक्षा विभाग पासवर्ड और आईडी ले रखा है। उसी आईडी और पासवर्ड से जन सेवा केंद्र संचालक क्षेत्र के जरूरतमंद ग्रामीणों को अपनी ठगी का शिकार खुलेआम बना रहा है।

