सीतापुर -साहित्य सृजन संस्थान द्वारा आयोजित शहीद ए आज़म भगत सिंह जयंती समारोह

by | Sep 30, 2021 | ई पेपर, जनहित, नेशनल, बड़ी खबर, राजनीती, स्थापना और प्रेरणा | 0 comments

बिसवाँ (सीतापुर):-साहित्यिक, शैक्षिक, सामाजिक सरोकारों को सपर्पित संस्था साहित्य सृजन संस्थान बिसवाँ सीतापुर के तत्वावधान में सृजन सरोकार (28) ई-काव्य गोष्ठी का आयोजन संस्थाध्यक्ष संदीप मिश्र सरस की अध्यक्षता में किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में एस जे डी इंटर कॉलेज बिसवां के प्रवक्ता वृन्दारक नाथ मिश्र एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ कवि डॉ विद्यासागर मिश्र उपस्थित रहे। साहित्यकार संदीप मिश्र सरस ने भगत सिंह के चिंतन को रेखांकित किया, “सत्य  कहता हूँ, मृत्यु जीवन से श्रेष्ठ होगी, याचना मैं क्षमादान हेतु करता नहीं। मेरा नाम है भगत, मेरी यह मान्यता है, व्यक्ति  मर  जाते हैं विचार मरता नहीं।। मुख्य अतिथि वृन्दारक नाथ मिश्र ने अपने शानदार उद्बोधन में कहा, सरदार भगत सिंह के साथ-साथ और न जाने कितने वीर शहीदों ने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिया। मगर उनको जो सम्मान मिलना चाहिए था वो नही मिल रहा है। हम सबकी यह जिम्मेदारी बनती है कि उनका उचित सम्मान करें। विशिष्ट अतिथि विद्यासागर मिश्र ने सुनाया, “आजादी के लिये लड़े थे सदा जान पर खेला। चूमा फांसी के फंदे को वन्दे मातरम बोला। दसों दिशाओं में होता यशगान सवेरे-शाम। क्रांतिवीर सरदार भगत सिंह शत-शत तम्हें प्रणाम।। युवा कवि संदीप यादव सरल ने पढ़ा, ” थर्राती थी नाम सुन, अंग्रेजी सरकार। बिल्कुल बब्बर शेर था, भगत सिंह सरदार।। शिव प्रताप सिंह चौहान “शिव” ने पढ़ा, “भगतसिंह आजाद युगों तक जग में अमर रहेंगे। चूमा था फांसी का फंदा जन जन याद रखेंगे।। युवा कवि अमोद शुभम मिश्र ने पढ़ा, दिव्यता की राह में  समाहित विस्तार  है,  एकान्त तारों की खोज में  अनगिनत ब्राह्मण है,। मुकेश पांडेय ने अपने तेवर में पढ़ा, “दर्द दिल का किसी को बताते नही। वार पर वार करती है दुनिया मगर, बेवजह हम किसी को सताते नही। धर्मेंद्र धवल शानदार काव्यपाठ में सुनाया, “बूढ़ा हो, या हो बच्चा, सबको याद जुबानी है। मातृभूमि के काम जो आई, तेरी धन्य जवानी है। जीवन अपना किया न्योछावर आजादी को वधू मानकर, बन्दूके बोने वाले, उस वीर भगत की कहानी है। कार्यक्रम में जीएल गांधी, हरिश्चन्द्र गुप्त, रामदास रतन, शिवेंद्र मिश्र शिव, आनंद खत्री आनन्द, मृत्युन्जय बाजपेयी, आदि कवियों ने भी काव्यपाठ किया। कार्यक्रम का सफल संचालन लवकुश शुक्ल ने किया और वाणी वन्दना मृत्युंजय बाजपेयी के द्वारा प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम के अंत में सहप्रभारी धर्मेन्द्र धवल ने आए हुए अतिथियों एवं कलमकारों को धन्यवाद दिया।