बीकापुर: उपनिबंधक की कुर्सी खाली, रजिस्ट्री कार्यालय के बाबुओं की बल्ले-बल्ले
बीकापुर अयोध्या – उप निबंधक कार्यालय बीकापुर में इन दिनों पूरी तरह से रामराज्य छा गया है उपनिबंधक के कार्यालय पहुंचने की तो बात दूर संबंधित लिपिक भी कार्यालय पहुंचने में मनमानी पर उतारू हैं। रजिस्ट्रार कार्यालय दलालों और अधिकारियों की जुगलबंदी से भ्रष्टाचार का गढ़ बन गया है। आए दिन जमीनों और मकानों की रजिस्ट्री, एग्रीमेंट और बसीयतनामा को रजिस्ट्रड करने के नाम पर अनपढ़ किसानों, क्रेताओं का जमकर आर्थिक शोषण किया जा रहा है।यह पूरा खेल रजिस्ट्रार के बड़े बाबू के संरक्षण में दलाल कर रहे हैं। क्रेताओं से खरीदी गई सम्पत्ति की मालकियत का 1 से 2 प्रतिशत हजारों में होता है। अन्दर के खर्च के नाम से वसूलकर रजिस्ट्रार तक पहुंचाए जा रहे हैं।2 वर्ष पूर्व फर्जी तरीके से मुख्तार आम बनने के बाद बैनामा किये जाने का मामला सामने आने पर रजिस्ट्री विवादों में घिर गई थी। जमीनों की खरीद फरोख्त को लेकर रजिस्ट्री दफ्तर के कर्मी संदेह के घेरे में हैं।बीकापुर निबंधक कार्यालय में रजिस्ट्रार की तैनाती होने के बाद से वह एक भी दिन कार्यालय नही आए। लेख पत्रों का निष्पादन एवं रजिस्ट्री कार्यालय के लिपिक किस आधार पर कर रहे हैं यह तो जांच का विषय है। क्या जमीन की रजिस्ट्री करने का अधिकार लिपिक को है ? यह भी चर्चा का विषय है। रजिस्ट्री कार्यालय में दलालों की भरमार है। दस्तावेज लेखकों के एक दर्जन लाइसेंस होने के बाद भी 4 दर्जन से अधिक दलाल एक दस्तावेज लेखकों के पास के पास बैठे देखे जाते है। कोविड 19 प्रोटोकाल की भी धज्जियां यहां उड़ाई जा रही हैं। रजिस्ट्री कार्यालय में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किए जाने का खुला खेल दस्तावेज लेखकों एवं कार्यालय के लेखकों तथा दलालों की मिलीभगत से खेला जा रहा है।सूत्रों से पता चला है कि इस समय उप निबंधक कार्यालय के लिपिक के भरोशे होने वाले बैनामो में बड़े स्तर पर लेन देन किया जा रहा है। ऑनलाइन समाचार अयोध्या द्वारा उप निबंधक कार्यालय का जायजा लिए जाने के बाद पूर्वान्ह 11:00 बजे तक उप निबंधक कार्यालय में रजिस्ट्रार की तो बात दूर कार्यालय के लिपिक भी नदारद मिले हैं। इस प्रकार से शासन की मंशा को खुलेआम उप निबंधक कार्यालय के कर्मियों द्वारा ठेंगा दिखाया जा रहा है।

