सांडा सीतापुर – का गांजर इलाका इस वक्त बाढ़ की आगोश में समाया हुआ है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है यह दशकों से ऐसे ही चला आ रहा है। जिसकी चपेट में सबसे ज्यादा गरीब, किसान आते हैं क्योंकि जिन इलाकों में बाढ़ का कहर बरपा है उन इलाकों में सबसे ज्यादा गरीब व किसान ही निवास करते हैं। लेकिन कृषि प्रधान देश में किसानों की समस्या का कोई हल नहीं। यह ऐसी ही समस्या है कि अगर कहा जाए कि यह समस्या अब अपने पैर जमा चुकी है तो गलत होगा। जरा एकांत में जाकर सो सोचिए कि आप जिस जमीन पर पैदा हुए और खेती करके और किसान अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं और वही जमीन आज आपके सामने बाढ़ के आगोश में समा गई और किसानों की लगी हुई फसल पानी के आगोश में समा गई और क्षेत्र का किसान रोता रहा रहा लेकिन कुछ नहीं कर पाया,अगर आपका घर आपके सामने नदी की धारा बहा ले जाए तो आपके आंखो से आंसू सूख जाएंगे लेकिन दिल को तसल्ली नहीं मिलेगी, जी हां कुछ ऐसा ही मंजर है विकासखंड सकरन क्षेत्र की ग्राम पंचायतों का कि किसानों की नजरों के सामने ही किसानों की फसलें पानी में समा गई और किसान रोता रहा कुछ नहीं कर पाया पानी का कहर इतना ज्यादा था कि किसी भी किसान को संभलने का मौका नहीं मिला आज किसान भुखमरी के कगार पर पहुंच चुका है शासन के आदेशानुसार मेहनत करके ग्राम पंचायतों में जाकर लंच पैकेट वितरित करवा रहे हैं और जो फसलें किसानों की नष्ट हुई है शासन की तरफ से मुआवजा दिलवाने की भी बात कर रहे हैं लेकिन यह कोई नई बात नहीं है कि कोई पहली बार बाढ़ नहीं आई है क्षेत्र में लेकिन शासन की तरफ से अभी तक ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई है कि गाजर क्षेत्रवासियों को बाढ़ से निजात मिल सके और किसानों को राहत की सांस मिल सके उन बाढ़ पीड़ितों के सामने जिनके यहां कुछ लोग पिकनिक मनाने पहुंच जाते हैं, यकीन नहीं करेंगे आप लेकिन यह सच है कि कुछ लोग राहत सामग्री सिर्फ इसीलिए बांटने जाते हैं कि बाढ़ की एक सेल्फी फेसबुक पर अपलोड करने को मिल जाएगी। कड़ुआ सच, मगर सत्य है। प्रशासन के लोग बाढ़ आने पर चाहे जितनी मेहनत कर लें लेकिन यही मेहनत अगर बाढ़ आने से पहले कर ली जाए इसकी रोकने के उपाय अगर पहले ही कर लिए जाएं तो यकीनन कई जिंदगियां और किसानों की फसलें बचाई जा सकती हैं कई घरों को डूबने से बचाया जा सकता है, बहुत से गरीबों के आशियाने बचाए जा सकते हैं,लेकिन नहीं अगर बाढ़ नहीं आयेगी तो नेता हवाई दौरा करने कहां जाएंगे, समाजसेवी सेल्फी खिचाने कहां जाएंगे। सरकार के खजाने से बाढ़ राहत के नाम पर मुआवजा कैसे निकलेगा। खैर जो भी हो जैसे भी हो इस प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए जिम्मेदारों को कड़े कदम उठाने होंगे और बाढ़ के कहर से किसानों की फसलों का उचित मुआवजा दिलवाया जाए जिससे किसानों को आर्थिक मदद मिल सके जिससे किसान अगली फसल की बुवाई कर सकें और अपने परिवार का पालन पोषण कर सके
सीतापुर – किसानों की नजरों के सामने ही समा गई फसलें पानी में

