पराली लगातार उत्तर प्रदेश की हवा को जहरीला कर रही है। सरकार के लाख प्रयासों के बावजूद यूपी में पराली जलाने की घटनाएं थम नहीं रही हैं। बीते साल की तुलना में इस वर्ष पराली जलाने की घटनाएं ज्यादा हुई हैं। सेटेलाइट से होने वाली निगेहबानी में हुए खुलासा होने के बाद 15 नवंबर को कृषि विभाग के अपर मुख्य सचिव ने सभी जिलों के रोकथाम के निर्देश दिए थे। अब 21 नवंबर की रिपोर्ट में फिर पराली जलाने के घटनाएं सामने आई हैं। प्रदेश के 10 जिलों में ही 50 से अधिक स्थानों पर पराली जलाने के मामले सामने आए हैं।पराली को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और सरकार का रुख सख्त है। राज्य सरकार ने पराली की घटनाएं रोकने को कई कदम उठाए हैं। किसानों को मुफ्त बायो डिकंपोजर दिया जा रहा है। यंत्र बैंक स्थापित किए जा रहे हैं। एफआईआर और जुर्माने का भी प्रावधान है। इन सबके बाद भी प्रदेश के कई जिलों में पराली लगातार जलाई जा रही है। 12 नवंबर तक की सेटेलाइट इमेजरी की रिपोर्ट में पूरे प्रदेश में पराली जलाने की 2237 घटनाएं सामने आई थीं। इनमें प्रदेश के 11 जिले ऐसे थे जहां 2020 की तुलना में इस साल ज्यादा पराली जलाई गई। इसमें शाहजहांपुर, मथुरा, पीलीभीत, रामपुर, लखीमपुर खीरी, बाराबंकी, गौतमबुद्ध नगर, हरदोई, कौशांबी, लखनऊ, महाराजगंज जिले शामिल हैं। अब इन मामलों में और इजाफा हो गया है।गौ आश्रय स्थलों पर फसल अवशेष पहुंचाने के निर्देशअपर मुख्य सचिव कृषि डॉ. देवेश चंद्र चर्तुवेदी ने सभी डीएम को दिए निर्देश में कहा था कि फसल अवशेष को निराश्रित गौ आश्रय स्थलों तक अधिकाधिक मात्रा में पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। इससे न केवल पराली जलाने की घटनाएं कम होने से प्रदूषण घटेगा बल्कि गायों के लिए चारे का प्रबंध भी हो जाएगा।
उत्तर प्रदेश – हवा में लगातार जहर घोल रही पराली

