हरदोई -तमाम कोशिशों वह दावों के बावजूद ,स्वेटर के लिए तरस रहे हैं एक लाख से अधिक बच्चे

by | Nov 25, 2021 | अपराध, ई पेपर, जनहित, नेशनल, बड़ी खबर, राजनीती, स्थापना और प्रेरणा | 0 comments

तमाम कोशिशों व दावों के बावजूद बेसिक शिक्षा विभाग के 3400 से अधिक स्कूलों में अध्ययनरत एक लाख से ज्यादा बच्चे स्वेटर के लिए तरस रहे हैं। सर्दी का मौसम शुरू हो गया है। ऐसे में उन्हें ठिठुरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कई बच्चे पुराने तो कई घरेलू स्वेटर का इस्तेमाल करके काम चला रहे हैं।बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के अनुसार जनपद में 4 लाख 95 हजार से अधिक बच्चे परिषदीय स्कूलों में पढ़ रहे हैं। इन्हें इस बार बार ड्रेस, जूता, मोजा मिलने में कोई दिक्कत न हो इसके लिए सरकार ने डीबीटी (डायरेक्ट फंड ट्रांसफर) स्कीम के तहत धनराशि मुहैया कराने की योजना शुरू की। इसे साकार करने में विलंब हो रहा है। यही वजह है कि एक लाख से ज्यादा बच्चे ऐसे हैं जिनके अभिभावकों को अभी तक सरकारी योजना की धनराशि नहीं प्राप्त हुई है।ये है योजनाबेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को प्रति छात्र दो जोड़ी यूनिफार्म के लिए 300 रुपये, स्वेटर के लिए 200 रुपये, जूते, मोजे के लिए 125 रुपये, स्कूल बैग के लिए 175 रुपये मिलने हैं।जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी वीपी सिंह का कहना है कि खंड शिक्षा अधिकारियों, स्कूलों के हेडटीचरों को जिम्मेदारी दी गई है। निर्देश दिए गए हैं कि जो भी कमियां हैं उन्हें दूर कराएं। 30 नवंबर तक समस्त बच्चों के खाते में रुपया भेजने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।14 हजार में पांच हजार बच्चों को ही मिला लाभमल्लावां। संवाददाताप्रत्येक वर्ष सर्दी शुरू होते ही बच्चों को दो जोड़ी ड्रेसे, एक जोड़ी जूता-मोजा और बैग किसी फर्म से खरीदकर बेसिक शिक्षा विभाग के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को शिक्षकों के माध्यम से वितरित कराई जाती थी। लेकिन इस बार सरकार ने यह कार्य विद्यालय से न कराकर (डायरेक्ट ट्रांसफर बेनीफिट) के माध्यम से बच्चों के अभिभावकों के खाते में भेजने का जो प्लान बनाया वह सफल होता नही नजर आ रहा है।शैक्षिक सत्र शुरू हुए 8 माह हो गए हैं। लेकिन अभी ब्लॉक मल्लावां के सरकारी स्कूलों में नामांकित लगभग 14000 बच्चों में मात्र 5 हजार बच्चों के माता-पिता के खाते में शासन की तरफ से दी जाने 1100 रुपये की धनराशि पहुंची है। बाकी किसी का खाता बन्द है। कई के आधार खाते से लिंक नहीं हंै। किसी का आधार और खाते में नाम अलग-अलग हैं। किसी के खाते में सालों से लेनदेन ही नही हुआ है। तमाम ऐसी समस्याएं हैं। जिनके कारण पैसा नही पहुंच रहा है। जिनके खाते में पहुंच गया है उन अभिभावकों का कहना कि इतने कम पैसे में इतनी चीजें खरीद पाना संभव नही है। बच्चे बिना ड्रेस, जूता और मोजा के आने को मजबूर हैं।