सीतापुर – नैमिषारण्य का विकास कागजी कार्रवाई तक ,कागजों पर बनी करोड़ों की योजनाएं नहीं उतरीं धरातल पर

by | Nov 30, 2021 | अपराध, ई पेपर, जनहित, नेशनल, बड़ी खबर, राजनीती, स्थापना और प्रेरणा | 0 comments

नैमिषारण्य। पौराणिक नगरी नैमिषारण्य का विकास कागजी कार्रवाई तक सिमट गया। आलम ये है कि कागजों पर बनी करोड़ों की योजनाएं धरातल पर नहीं उतर सकीं। तपोभूमि के अन्य स्थानों की तो बात छोड़िये राजघाट और चक्रतीर्थ का सौंदर्यीकरण भी फिलहाल अधर में है। ऐसे में विकास कार्यों के माध्यम से तीर्थ नगरी को विश्व पटल तक पहुंचाने के दावे फिलहाल जिम्मेदारों की हीलाहवाली के चलते पूरे होते नजर नहीं आ रहे।महर्षि वेद व्यास ने चार वेद, छह शास्त्र और 18 पुराणों की रचना इसी नैमिषारण्य की तपोभूमि में रहकर पूरी की थी। ऐसे में तीर्थ नगरी का विशेष महत्व है। हर वर्ष यहां होने वाली 84 कोसी परिक्रमा में लाखों श्रद्धालु आते हैं, इनमें काफी संख्या विदेशियों की भी है। विश्व स्तर पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए तमाम से विकास कार्यों की योजना बनाई गई। बताते हैं कि इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर इसमें सक्रियता नहीं बरती गई। जिसके कारण नैमिषारण्य का चक्रतीर्थ, राजघाट सहित अन्य स्थानों के सौंदर्यीकरण नहीं हो सके। नैमिष तीर्थ को विश्व पटल पर लाने के उद्देश्य से विदेशी पर्यटकों के लिए हवाई यात्रा और जलमार्ग का भी मसौदा तैयार हुआ लेकिन व्यवस्थाएं धरातल पर नहीं उतर सकीं।10.31 करोड़ की कार्ययोजना हुई थी तैयार: वर्ष 2017 में महानिदेशक पर्यटन ने नैमिष तीर्थ के लिए 10.31 करोड़ 12 हजार रुपए की कार्य योजना तैयार कराई थी। इसके अतिरिक्त करोड़ों रुपए और भी इस योजना में शामिल हुए थे। विकास कार्यों में नालियां ढकना, सुलभ प्रसाधन, इंटरलॉकिंग, यात्री शेड और तीर्थ परिसर को और भी आकर्षक बनाना शामिल था। तीर्थ पुरोहित कमेटी में महामंत्री रहे अमरनाथ शास्त्री कहते हैं कि शासन की योजनाएं तो मजबूत थीं लेकिन उसे धरातल पर उतरने से पहले ही जिम्मेदारों ने कागजी दांव-पेंचों में फंसा दिया।पर्यटन मंत्री ने तैयार किया था विकास का एजेण्डापर्यटन मंत्री नीलकंठ तिवारी तीर्थ नैमिषारण्य आए थे। तीर्थ के प्रमुख स्थलों के दर्शन किये किए और समीक्षा की भी की। इसके उपरांत उन्होंने बैठक आहूत की जिसमें तीर्थ के विकास का एजेंडा तैयार हुआ था। मंत्री ने बताया था कि तीर्थ में विकास परिषद के गठन से पहले ही सभी संभावित योजनाओं को अमली जामा पहनाया जाएगा।नहीं बदली विकास की तस्वीरनैमिष तीर्थ को संवारने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तमाम सी घोषणा के बीच सौ करोड़ की सौगात दी थी। जिसमें नैमिष के हर क्षेत्रों का विकास शामिल था। तीर्थ पुरोहित आनंद भाई शास्त्री बताते हैं कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं के बावजूद जिम्मेदारों की ओर से कोई खास ध्यान नहीं दिया गया। जिससे नैमिष की व्यवस्था बदहाल है। विद्युत आपूर्ति की अक्सर होने वाली बाधा का असर वाटर सप्लाई पर पड़ रहा है। नैमिषारण्य आने वाले तीर्थ यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।हाईमास्क तो लगीं लेकिन कुछ समय बाद बेअसर: सूद गद्दी के महंत मनीष शास्त्री बताते हैं कि वर्ष 2007 में बसपा व 2012 सपा सरकार में नैमिष तीर्थ में कई चिन्हित स्थानों पर हाई मास्क लाइटओं का जाल बिछाया तो गया था, लेकिन कारगर साबित नहीं हुआ। कुछ समय बीतने के बाद यहीं हाई मास्क शोपीस बन गए।वाटर सप्लाई पाइप में रहता है लीकेज: तीर्थ पुरोहित आनंद भाई शास्त्री बताते हैं कि नैमिष तीर्थ नगरी में गंदगी की भरमार है। जगह-जगह पानी पाइप के लीकेज हैं, ये समस्या को बढ़ा रहे हैं। रोजाना आने वाले श्रद्धालुओं को पढ़ रहा है।दर्शन के लिए गंदे पानी से निकलना मजबूरी: नैमिष तीर्थ कमेटी के पूर्व महामंत्री अमरनाथ शास्त्री बताते हैं कि नैमिषारण्य विश्व विख्यात ऐतिहासिक और पौराणिक तीर्थ है। इसका विकास जिस प्रकार तीर्थ पुरोहितों साधु-संतों व नगर निवासियों ने आशा की थी, वैसा कुछ भी नहीं हुआ है। नगर पालिका के जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। बताते हैं कि तीर्थ में आगंतुकों को स्नान दर्शन के लिए गंदे पानी से निकलना पड़ता है।कोट—————नैमिष विकास परिषद का गठन हो चुका है। विकास कार्य के लिए पत्रावलियां शासन को भेजी जा चुकी हैं, स्थानीय स्तर पर प्रकाश व्यवस्था, सामुदायिक शौचालय और साफ-सफाई पर लगातार नजर रखी जा रही है। -मिथलेश त्रिपाठी, एसडीएम मिश्रिख