लखनऊ -आज जारी हो जाएगा कर्मचारियों की बर्खास्तगी का आदेश

by | Dec 2, 2021 | अपराध, ई पेपर, जनहित, नेशनल, बड़ी खबर, राजनीती, स्थापना और प्रेरणा | 0 comments

लखनऊ में एक आईएएस अफसर और पीसीएस अफसर के बीच पहले से चल रहा कोल्डवार और गहरा गया है। मामला है तथ्यों को छुपाकर मार्ग प्रकाश विभाग में 25 संविदाकर्मयों को स्थायी किए जाने के मामले में जारी नोटिस का। इसका जवाब देने के बजाए पीसीएस अफसर अमित कुमार ने नगर आयुक्त अजय द्विवेदी को नोटिस लौटा दिया और इसे लेकर साक्ष्य मांग लिए हैं। अब नगर आयुक्त की ओर से साक्ष्य भेजे गए हैं। वहीं, संविदाकर्मियों की बर्खास्तगी का आदेश बुधवार को जारी हो जाएगा।मामले का खुलासा अमर उजाला ने किया था। करीब चार महीने पहले हुई नियुक्ति के समय पीसीएस अफसर अमित कुमार नगर निगम में अपर नगर आयुक्त पद पर तैनात थे और अधिष्ठान विभाग का काम देखते थे। संविदा कर्मचारियों को स्थायी किए जाने को लेकर बनी परीक्षण कमेटी में भी थे, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर ही नियुक्ति की गई। इसे लेकर दो महीने पहले यह विवाद सामने आया था कि 25 में चार ऐसे कर्मचारी नियुक्त किए गए, जिनके बारे में कोर्ट से आदेश नहीं था। इसके बाद नगर निगम प्रशासन ने चुपचाप इन्हें बर्खास्त कर दिया।अब बीते सप्ताह सामने आया कि संविदा से स्थायी किए जाने के इस प्रकरण में न्यायालय में विशेष अपील भी लंबित है। ऐसे में कोई निर्णय आए बिना नियुक्ति करना गलत है। इसके बाद कमेटी सवालों के घेरे में आ गई और पीसीएस अफसर अमित कुमार, अधिष्ठान प्र्रभारी एके सिंह, मुख्य अभियंता आरएन त्रिपाठी, कार्यालय अधीक्षक दिनेश वर्मा, अधिष्ठान लिपिक अतहर और मार्ग प्रकाश विभाग बाबू प्रियंक तिवारी को नोटिस जारी किया गया था। साक्ष्य नहीं, पत्र मूल से रूप से वापस किया जा रहामामले में 22 नवंबर को नगर आयुक्त अजय द्विवेदी ने नोटिस जारी कर पांच दिन में जवाब मांगा था। लेकिन अमित कुमार ने 23 नवंबर को इसे लौटा दिया और कहा कि नोटिस के साथ उल्लिखित साक्ष्यों की प्रतियां संलग्न नहीं हैं। पत्र इस आशय से मूलरूप में लौटाया जा रहा है कि प्रकरण में नियमानुसार कार्रवाई करने का कष्ट करें।नोटिस का समय पूरा हो गया है। जिन्हें आपत्ति थी, उनको साक्ष्य भी भेज दिए गए हैं। अब कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा। तथ्यों को छुपाकर की गईं नियुक्तियों को निरस्त किया जाएगा। बुधवार को आदेश जारी कर हो जाएंगे।- अजय द्विवेदी, नगर आयुक्त