उत्तर प्रदेश -विभिन्न जिलों के 22 सैंपल में से 21 में मिला डेल्टा वैरिएंट, एक सैंपल खराब

by | Dec 7, 2021 | अपराध, ई पेपर, जनहित, नेशनल, बड़ी खबर, राजनीती, स्थापना और प्रेरणा | 0 comments

प्रदेश में कोरोना वायरस का डेल्टा वैरिएंट बरकरार है। यह खुलासा जीनोम सिक्वेसिंग में हुआ है। शत-प्रतिशत मामलों में डेल्टा का ही असर मिल रहा है। हालांकि नए वैरिएंट ओमिक्रॉन का अब तक एक भी केस नहीं मिला है। प्रदेश में डेल्टा के केस मिलने से ओमिक्रॉन से कहीं ज्यादा खतरा बना है।ओमिक्रॉन वैरिएंट के सामने आने के बाद हर स्तर पर चौकसी बरती जा रही है। इसी के तहत प्रदेश में जीनोम सिक्वेंसिंग कराई जा रही है। पिछले दो दिन में 22 सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग की गई है। इसमें एक सैंपल खराब हो गया, जबकि 21 में डेल्टा वैरिएंट मिला है। यह दूसरी लहर के दौरान कहर मचा चुका है। डेल्टा वैरिएंट की संक्रमण दर और मारक क्षमता अधिक है। यह शरीर के विभिन्न हिस्से को प्रभावित करता है। शत-प्रतिशत केस डेल्टा के मिलने से स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है।निगरानी बढ़ाने के निर्देशस्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. वेदब्रत सिंह ने बताया कि सभी सैंपल डेल्टा के मिलने के बाद निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। हर जिले से सैंपल मंगाकर जीनोम सिक्वेंसिंग कराई जा रही है। जल्द ही कुछ और सैंपल के परिणाम सामने आएंगे तभी स्थिति साफ हो पाएगी। हर स्तर पर एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं।मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग की प्रवृति बनाए रखनी होगी : डॉ. हिमांशुकेजीएमयू के संक्रामक रोग नियंत्रण यूनिट के प्रभारी डॉ. डी हिमांशु ने बताया कि अभी मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और हाथ धुलने की प्रवृत्ति बनाए रखनी होगी। दूसरी लहर में ज्यादातर केस डेल्टा के थे। यह वैरिएंट इम्यून सिस्टम को भी चकमा दे सकता है। डेल्टा वैरिएंट पर मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थेरेपी का असर होता है, लेकिन डेल्टा प्लस वैरिएंट पर इस थेरेपी का कोई असर नहीं होता। डेल्टा वैरिएंट को लेकर पिछले दिनों इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह वैरिएंट वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके लोगों को भी अपनी चपेट में ले सकता है।कम गंभीर प्रकृति का है ओमिक्रॉन : डॉ. अजयकेजीएमयू के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. अजय वर्मा ने बताया कि जिन देशों में ओमिक्रॉन मिला है, वहां की रिपोर्ट में बताया गया है कि ओमिक्रॉन का मरीजों पर असर कम गंभीर है। इसको बीटा और डेल्टा से आनुवांशिक रूप से अलग बताया गया है। हालांकि यह भी देखा गया है कि इसकी चपेट में आने वालों को ज्यादा समस्या नहीं हुई है। कुछ को अस्पताल में भर्ती करने की भी जरूरत नहीं पड़ी। यह संतोष की बात है। लेकिन किडनी ट्रांसप्लांट, लंबे समय से दवाएं लेने वाले, हार्ट के मरीजों को सावधान रहना होगा।