सीतापुर -कार्य बहिष्कार के बीच ‘हांफती सेवाएं

by | Dec 16, 2021 | अपराध, ई पेपर, जनहित, नेशनल, बड़ी खबर, राजनीती, स्थापना और प्रेरणा | 0 comments

सीतापुर। आठवें दिन भी डिप्लोमा फार्मासिस्ट हड़ताल पर रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा असर देखने को मिला। कई ऐसे भी मरीज थे, जिन्हें झोलाछाप की मदद लेनी पड़ी। डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन द्वारा हड़ताल का सबसे अधिक असर बाढ़ और कटान प्रभावित क्षेत्रों में देखने को मिला।डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन द्वारा घोषित आंदोलन के क्रम में गुरुवार को आठवें दिन भी पूरे जनपद के स्वास्थ्य केन्द्रों पर कार्य बहिष्कार किया गया। जिला चिकित्सालय में सुबह आठ बजे से दस बजे तक सभी फार्मासिस्ट कार्य से विरत रहे। सुबह नौ बजे पर्चा काउण्टर पर लंबी भीड़ थी। यहीं पर श्यामनाथ से पिंकी और उनका परिवार मौजूद था। पूछने पर पता चला कि सभी बुखार से पीड़ित थे। ओपीडी में चिकित्सक डॉ. डी लाल मौजूद थे। इन्होनें पिंकी के बच्चों के अलावा पुराना शहर के मिरदही टोला निवासी सूफियान, पक्का बाग निवासी सुशील और आवास विकास के अनूप के परिवार को चिकित्सीय परामर्श दिया। पैथालॉजी पर कुछ टेस्ट लिखे और दवाएं भी खाने को बताई गईं लेकिन बाधा देखने को मिली। पैथालॉजी और दवा वितरण कक्ष में फार्मासिस्ट के न होने से मरीज और तीमारदार दोनों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। यहीं पर कुछ लोग ऐसे भी थे, जो इन लोगों को जिला अस्पताल के बाहर ले जा रहे थे। निजी पैथालॉजी पर भीड़ अधिक थी। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के मंत्री विनय कुमार सिंह का कहना है कि शुक्रवार से हड़ताल में और तेजी आएगी।टीकाकरण ही नहीं एक्सरे भी नहीं हुआतंबौर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती मरीजों व बाहर से आए मरीजों व उनके तीमारदारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। स्वास्थ्य केन्द्र पर सौरभ मौजूद थे। पूछने पर पता चला कि उन्हें कुत्ते ने काट लिया है। स्वास्थ्य केन्द्र में फार्मासिस्ट की हड़ताल से टीका नहीं लग सका। अब उन्हें सीतापुर जाना पड़ेगा। यहीं पर रिहार से आये राममूर्ति भी थे। ग्रामीण बताते हैं कि तीन दिनों से वे दौड़ लगा रहे हैं। चोट लगने के कारण चिकित्सक ने एक्सरे के लिए बताया है। अब उन्हें बाहर का सहारा लेना पड़ेगा।दवाओं के लिए दस किमी की लंबी दौड़बहादुरगंज। उप स्वास्थ्य केन्द्र पर राजू, बुद्ध सागर, पवन कुमार, इमरान, चिंटू, सुफियान मौजूद थे। पूछने पर राजू बताते हैं कि दवा वितरण की व्यवस्था पहले से ही खस्ताहाल थी। फार्मासिस्ट की हड़ताल के बाद अब दस किलोमीटर की दूरी तय करके सीएचसी रामपुर मथुरा जाना मजबूरी है। बुद्ध सागर बताते हैं कि परिवार के पांच लोगों को तेज बुखार है, ऐसे में झोलाछाप का सहारा लेना मजबूरी है। पवन कुमार बताते हैं कि उप स्वास्थ्य केन्द्र में चिकित्सक की तैनाती नहीं है। ऐसे में हड़ताल का असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। दवा न मिलने से परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है। इमरान और चिंटू कहते हैं कि विरोध करने का ये तरीका ठीक नहीं है। सुफियान ने कहा कि बाढ़ और कटान क्षेत्रों में बाढ़ के बाद संक्रमण का बड़ा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। ऐसे में शिविर लगाकर लोगों की जांच और दवाओं का वितरण हितकर रहेगा।