सीतापुर – आवश्यकताओं के अनुरूप सहूलियत नहीं ,पैमाइश की बाधा में फंसा ‘किसानों का भविष्य

by | Dec 22, 2021 | अपराध, ई पेपर, जनहित, नेशनल, बड़ी खबर, राजनीती, स्थापना और प्रेरणा | 0 comments

बहादुरगंज(सीतापुर)। घाघरा की धार में किसानों का भविष्य बह चुका है। आलम ये है कि नदी किनारे खाली पड़ी जमीन में उम्मीदों की पौध उगाने के लिए किसानों को एक साल से लम्बी दौड़ लगानी पड़ रही है। हालांकि प्रशासन प्रयासरत है लेकिन अभी तक रामपुर मथुरा ब्लॉक क्षेत्र के अंगरौरा ग्राम वासियों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप सहूलियत नहीं मिल सकी है।हम बात कर रहे हैं बाढ़ और कटान क्षेत्र से प्रभावित रामपुर मथुरा ब्लॉक क्षेत्र के अंगरौरा ग्राम पंचायत की। इसी के करीब से होकर शारदा नदी निकलती है। कई वर्षों पहले करीब ढाई हजार से अधिक की आबादी रहती थी। आजीविका के लिए 70 फीसद लोग खेती पर आधारित थे। गांव वासी हनुमान बताते हैं कि बाढ़ की त्रासदी ने गांव की तस्वीर ही बदल कर रख दी। एक-एक कर गांव वासियों के खेत नदी में समा गए। फूलचन्द्र बताते हैं कि उनकी जमीन का बड़ा हिस्सा कटान में समाप्त हो गया। आजीविका के लिए भूमि की मांग की तो छह किमी दूर रायसेनपुर गांव का प्रशासनिक अमले ने हवाला दिया। बताते हैं कि इतनी दूर जाकर भूमि को समेटना किसी बड़ी समस्या से कम नहीं था। अर्जुन कहते हैं कि कई बार आवेदन किये तो कागजी पड़ताल शुरू हुई। एक वर्ष पहले की बात है, भूमि का सीमांकन करने के लिए बाराबंकी और बहराइच जिले की प्रशासनिक टीम को बुलाया गया। काफी देर तक कागजों की खाक छानी गई फिर ब्योरा तैयार करके आश्वासन मिला। बताते हैं कि तबसे आज तक केवल दौड़ ही हाथ लगी है। मिश्रीलाल कहते हैं कि इलाके के ग्रामीणों की आजीविका के लिए एक मात्र स्रोत खेती बाड़ी का था, जो अब नहीं रहा। ऐसे में कई परिवारों की आर्थिक स्थितियां खस्ताहाल हो चली हैं।खाली जमीन तो है लेकिन अधिकार नहींअंगरौरा गांव वासियों की करीब सत्तर फीसद भूमि पैमाइश न होने के कारण अव्यवस्थाओं में फसी है। ऐसे में ग्रामीण जमीन पर काबिज नहीं हो पा रहे हैं, रामनरेश बताते हैं कि नदी किनारे एक बड़ा भू-भाग खाली है। यदि यही खाली जमीन उन लोगों को मिल जाए, तो आजीविका का संकट समाप्त हो सकता है। बताते हैं कि इसको लेकर समय-समय पर ब्लॉक स्तर पर प्रार्थना पत्र भी दिये जा चुके हैं लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने खास गंभीरता नहीं ली।हो चुकी हैं हिंसक वारदातेंपेट की भूख जो न कराए, वो कम है। गत वर्ष पूर्व ऐसा ही कुछ मामला इसी से जुड़ा देखने को मिला। बताते हैं कि इलाके के कुछ लोग खाली जमीन पर जोताई कर रहे थे। इसी दौरान पड़ोस जिला बहराइच सीमा क्षेत्र के काफी संख्या में लोगए आ गए। खासा बवाल भी हुआ। इस मामले में दो जिलों की पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। तबसे विवाद की स्थिति तो नहीं हुई लेकिन हालात कई बार बिगड़ भी चुके हैं।190 बीघा जमीन का गहराया संकटरामपुर मथुरा ब्लॉक क्षेत्र की 190 बीघा जमीन का संकट गहरा गया है। गांव निवासी हनुमान की करीब बीस बीघा जमीन कागजों में फसी है। किसान फूलचंद की भी इतनी ही है। अर्जुन की तीस बीघा ओर बेलदार, मंगल और चंदर की दस-दस बीघा जमीन शारदा नदी काट चुकी है। मिश्रीलाल और रामकुमार की पांच बीघा जमीन पर संकट है। तिलकराम और रामनरेश 40 बीघा के किसान हैं।पैमाइश के लिए ब्लॉक से प्रार्थना पत्र और कागजात मंगवाए गए हैं। प्रार्थना पत्र मिलते ही टीम गठित की जाएगी। उसी के आधार पर किसानों को राहत मिलेगी। बाढ़ और कटान पीड़ितों को लगातार मुआवजा और आर्थिक संकट से उबरने के लिए धनराशि व खाद्यान्न सामग्री वितरित की जाती रही है- दिव्या ओझा, एसडीएम महमूदाबाद