मान्यता के लिए दिहाड़ी मजदूरों की सेहत से खेलने वाले अस्पताल पर अफसर मेहरबान हैं। घटना के 24 घंटे गुजरने के बाद भी अफसर यही तय नहीं कर पाए कि अस्पताल पर कार्रवाई कौन करेगा? स्वास्थ्य विभाग के अफसर नोटिस भेजकर शांत हो गए हैं तो चिकित्सा शिक्षा विभाग ने घटना से ताल्लुक न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया हैमंगलवार को दुबग्गा स्थित डॉ. आरआर सिन्हा मेमोरियल हॉस्पिटल में 125 से अधिक दिहाड़ी मजदूरों को 500 रुपये प्रति श्रमिक देकर अस्पताल लाया गया, 13 से ज्यादा मजदूरों को बिना बताए वीगो, इंजेक्शन आदि चढ़ा दिया गया। कुछ विरोध कर भागे तो बाकियों को बंधक बना लिया गया था। एक मजदूर जान बचाकर भागने में कामयाब हुआ और पुलिस को सूचना दी। कई थानों की पुलिस ने हॉस्पिटल में छापेमार कर मजदूरों को रिहा कराया था।अस्पताल के दलाल पकड़ से दूरमजदूरों की जान से खेलने वाले अस्पताल पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई है। जबरन इलाज कराने वाले अभी तक आजाद हैं। मजदूरों को बहला-फसुलाकर लाने वाले दलाल भी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने अभी अस्पताल को नोटिस जारी की है। इसमें घटना के वक्त भर्ती मरीज, इलाज का ब्यौरा तलब किया है। अस्पताल पर छापेमारी तक की जहमत नहीं उठाई है। आशंका है कि अस्पताल के डॉक्टर-कर्मचारी सुबूत मिटा सकते हैं। अफसरों की मेहरबानी से सेहतमंद मजदूरों का जबरन इलाज करने वाले आजाद हैं।अस्पताल से विभाग से कोई लेना-देना नहीं है। दस्तावेज में मेडिकल कॉलेज दर्ज ही नहीं है।डॉ. एनसी प्रजापति,चिकित्सा शिक्षा विभाग महानिदेशक
लखनऊ – दिहाड़ी श्रमिकों को बंधक बनाने वाले अस्पताल पर अफसर मेहरबान

