चुनावी बेला में मतदाता भी रंग बदलने में नेताओं से पीछे नहीं हैं। अधिकांश लोग जो भी वोट मांगने के लिए पहुंच जाता है उसी से कहने लगते हैं आपकी जय हो। आपको ही जिताएंगे। बस हमारा ख्याल रखिएगा।बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्र हो या कसबा अथवा जिला मुख्यालय हर तरफ लोग नेताओं व चुनाव प्रचार में लगी उनकी टोली से सीधी बुराई नहीं लेना चाहते हैं। आपसी चर्चाओं के दौरान तो लोग अलग-अलग दलों व प्रत्याशियों की खूबी व कमियां गिना रहे हैं लेकिन जब सियासी टोलियां आती हैं तो वे सिर्फ सामने वाले की तारीफ के पुल बांधने में जुट जाते हैं। जो वोट की चिरौरी करता है उसी को वोट देने की हामी भर देते हैं। प्रत्याशी नजर आने पर उसे जीत का आर्शीवाद भी देते हैं।जीतेगा कोई एक ही, जिता भी किसी एक को सकते हैं, तो फिर सबको आर्शीवाद क्यों दिया ? पूछने पर वोटर यह कहकर बचाव करते हैं कि अभी कुछ तय नहीं किया है। अपने मापदंडों पर नापतौल कर रहे हैं। अभी किसी को निराश करने से क्या मिलेगा। जिस तरह से नेता कोई भी समस्या बताने पर तुरंत जीतते ही उसका समाधान कराने का प्रयास करने का वायदा कर रहे हैं उसी तरह वे भी सामने वाले का ही समर्थन करने का वादा कर देते हैं। जब नेता अपने वादे से मुकर जाते हैं तो वे क्यों पीछे रहें ?
हरदोई -चुनावी बेला में मतदाता भी रंग बदलने में नेताओं से पीछे नहीं

