उत्तर प्रदेश -पॉवर कार्पोरेशन के 55 जेई बर्खास्त, बिना अनुमति पांच साल से ज्यादा अनुपस्थित रहने पर हुई कार्रवाई

by | Feb 26, 2022 | अपराध, ई पेपर, जनहित, नेशनल, बड़ी खबर, राजनीती, स्थापना और प्रेरणा | 0 comments

बिना पूर्व सूचना और उच्चाधिकारियों की अनुमति के लंबे समय से ड्यूटी से अनुपस्थित चल रहे पॉवर कार्पोरेशन के 55 अवर अभियंताओं की सेवा समाप्त कर दी गई है। जिन अवर अभियंताओं को बर्खास्त किया गया है उन पर पांच वर्ष या उससे ज्यादा समय से ड्यूटी से गायब रहने का आरोप है। दिलचस्प बात यह है कि जांच के दौरान इनमें से बहुत से अवर अभियंताओें जांच अधिकारी के समक्ष अपने बचाव में पक्ष तक नहीं रखा। बर्खास्त किए गए अवर अभियंता पावर कार्पोरेशन व उसकी सहयोगी कंपनियों में तैनात थे।पॉवर कार्पोरेशन मुख्यालय समेत विद्युत वितरण कंपनियों में तैनात 91 अवर अभियंता पांच वर्ष या उससे ज्यादा समय से बिना किसी पूर्व सूचना या उच्चाधिकारियों की अनुमति के ड्यूटी से लगातार अनुपस्थित चल रहे थे। मामला संज्ञान में आने केबाद पावर कार्पोरेशन के अध्यक्ष एम. देवराज ने 12 अप्रैल 2021 को इसकी विस्तृत जांच मुख्य अभियंता (जांच समिति) को सौंपी थी। मुख्य अभियंता की जांच रिपोर्ट केआधार पर 55 अवर अभियंताओं की सेवा समाप्त करने का फैसला किया गया है। इस संबंध में पावर कार्पोरेशन प्रबंध निदेशक पंकज कुमार ने आदेश जारी कर दिया है। इन 91 अवर अभियंताओं में चार राज्य विद्युत उत्पादन निगम में तैनात हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई उत्पादन निगम कार्रवाई करेगा। शेष 87 में से 55 की बर्खास्तगी हो गई है जबकि जल्द ही 32 और जेई के खिलाफ की जाएगी। इनके खिलाफ औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।जांच रिपोर्ट में अवर अभियंताओं के पांच से 10 वर्ष से ज्यादा समय से लगातार कार्यालय में अनुपस्थित रहने का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इस संबंध में न तो उन्होंने अपने उच्चाधिकारियों से पूर्व अनुमति ली है और न ही अनुपस्थित रहने के बारे में कोई सूचना ही भेजी है। यही नहीं इन अवर अभियंताओं की ओर से नियंत्रक अधिकारियों से वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट तक दर्ज नहीं कराई गई। अवर अभियंताओं के इस आचरण को कर्तव्यों एवं दायित्वों के निर्वहन में शिथिलता मानते हुए कहा गया है कि यह कार्पोरेशन के नियमों व उ.प्र. सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली 1956 के प्रावधानों का उल्लंघन है। जांच रिपोर्ट के अनुसार आरोपी अवर अभियंताओं को उनके आवासीय पते पर भेजे गए आरोप पत्र का उत्तर न मिलने पर समाचार पत्रों में भी सूचना प्रकाशित कराई गई। इसके बाद भी कोई जवाब नहीं मिला। इन औपचारिकताओं केआधार पर आरोप को सही मानते हुए प्रबंधन से कार्रवाई की संस्तुति की गई। जांच अधिकारी की रिपोर्ट और उ.प्र. सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली के प्रावधानों के तहत अवर अभियंताओं की सेवा समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया गया।इन अवर अभियंताओं की हुई बर्खास्तगीरणधीर सिंह, संतोष कुमार वर्मा, हशमते आजम, संजय पासवान, दिनेश राम, जगजीवन कुमार, अनिल कुमार, शिवराज वर्मा, राजीव कुमार सिंह, सर्वेश नारायण, सुमित जायसवाल, शेषमणि विश्वकर्मा, मोहन सिंह यादव, सिद्धार्थ गुप्ता, अशोक यादव, शैलेंद्र कुमार, अनूप कुमार, राजेंद्र कुमार, रमेश चंद्र, अनिल कुमार, मनींद्र कुमार गुप्ता, साधु शरण वर्मा, रूपेश कुमार मौर्य, शैलेश प्रजापति, सत्यवीर सिंह, महफूज अली, सचिन कुमार जैन, सुबोध चंद्र प्रेमी, राजेश्वर विश्वकर्मा, अनिल कुमार सोनकर, मीनाक्षी सिंह, कोमल सिंह, गिरिजेश कुमार, महेंद्र सिंह, गौरव कुमार श्रीवास्तव, मुकेश कुमार कुशवाहा, जय प्रकाश, संदीप कुमार गुप्ता, छोटे लाल, दिनेश चंद्र, राम सिंह, ब्रजेश यादव, हेमंत कुमार, कुलदीप, प्रतोष कुमार, राजीव कुमार, गंभीर सिंह, (आईडी-9468), गंभीर सिंह (आईडी 8557) अरविंद कुमार रे, प्रदीप कुमार, संजीव कुमार, शिव शंकर प्रसाद, मनीष लाल, गंगा सागर शर्मा तथा मिश्री लाल मौर्य।