लखनऊ -वेतन देने के लिए भी नहीं है पैसा, ध्वस्त होगी शहर की सफाई व्यवस्था

by | Mar 8, 2022 | अपराध, ई पेपर, जनहित, नेशनल, बड़ी खबर, राजनीती, स्थापना और प्रेरणा | 0 comments

शहर की सफाई व्यवस्था और ज्यादा खराब होने वाली है। कार्यदायी संस्था से तैनात 1944 सफाई कर्मियों को हटाने का फैसला किया गया है। मानक के हिसाब से कर्मचारियों की संख्या पहले ही कम थी। उसमें अब यह फैसला गंदगी का बढ़ावा देगा। बताया जा रहा है कि आर्थिक घाटा का हवाला देते हुए वार्डों में ठेके पर लगे सफाई कर्मियों की संख्या में कटौती की गई है। डिप्टी कलेक्टर व प्रभारी आउटसोर्सिंग यमुना धर चौहान ने इसको लेकर आदेश जारी किया है।नगर निगम में पहले ही मानक के हिसाब से सफाई कर्मचारियों की कमी है, ऐसे में एक साथ करीब 20 फीसदी कर्मचारियों को बाहर रखना नगर निगम के लिए काफी नुकसान दायक फैसला होगा। इसका असर शहर की 30 लाख से ज्यादा की आबादी पर बड़ेगा। सभी 110 वार्ड की सफाई व्यवस्था खराब हो जाएगी। हालांकि नगर निगम के अधिकारी इस बात से इंकान कर रहे हैं। दूसरी तरफ पार्षदों ने इसको तानाशाही फैसला बताया है। इससे 2 हजार परिवार पर भी असर पड़ेगा।10 हजार कर्मचारी तैनात हैनगर निगम में मौजूदा समय 10,258 सफाई कर्मचारी कार्य कर है। 1944 कर्मियों के हटाए जाने के बाद कार्यदायी संस्था से अब 8314 कर्मचारी ही बचे हैं। बता दें कि नियमित 4200 कर्मचारियों और सेवानिवृत्त 3800 कर्मियों के वेतन, पेंशन पर हर महीने करीब 32 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। इसी तरह कार्यदायी संस्था से तैनात 11 हजार कर्मियों के मानदेय पर करीब हर महीने 10 करोड़ रुपये का खर्च आता है।शासन स्तर पर कटौती से असरनगर निगम के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि यह असर शासन स्तर पर हुई कटौती की वजह है। अमृत योजना के तहत हर महीने वहां से करीब 10 करोड़ रुपए आता था, लेकिन अब वह नहीं आ रहा है। इसके बाद कर्मचारियों को हटाने का फैसला किया गया है।अभी नगर निगम पर कार्यदायी संस्था के कर्मचारियों का करीब चालीस करोड़ रुपए का बकाया है। इससे पहले भी 500 कर्मचारियों को हटाया गया था, हालांकि उस समय दलील थी कि मौके पर कर्मचारी कम हैं, जबकि कागजों में ज्यादा है। इनके नाम पर ठेकेदार को भुगतान किया जा रहा है।नरक बन जाएगा लखनऊ नगर निगमपार्षद अमिता सिंह का कहना है कि यह फैसला जनहित में नहीं है। कम कर्मचारियों के चलते ही वैसे ही शहर की सफाई व्यवस्था नरक बनी हुई थी। इस पर अब कर्मचारियों की कटौती करने से शहर की सफाई व्यवस्था और बदतर हो जाएगी। सफाई कर्मचारियों को हटाए जाने के बजाय बढ़ाया जाना चाहिए था। करीब दो हजार कर्मियों के हटाए जाने से अधिकतम 20 कर्मचारी प्रति वार्ड कटौती की गई है। नाराज कांग्रेस पार्षद अमित चौधरी ने महापौर संयुक्ता भाटिया को पत्र लिखते हुए इस निर्णय को हास्यास्पद बताया है।