सिर्फ कुंडा ही नहीं, पूरे यूपी में सिर्फ राजा भैया सुनकर लोग उन्हें पहचान लेते हैं। उनकी शख्सियत ही ऐसी है कि कुंडा के लोगों के लिए पुलिस और कोर्ट… सबकुछ राजा भैया ही हैं। यूपी के लोगों ने अपनी सरकार भले ही चुन ली, लेकिन कुंडा के लोगों ने अपनी सरकार को सिर-माथे पर नतीजों से पहले ही बैठा लिया। यहां राजा भैया का दरबार लगना शुरू भी हो गया।ये दरबार सिर्फ किसी विधायक भर का नहीं है। कुंडा के लोगों के लिए यही अदालत है। बेंती महल में लगने वाले इस दरबार में सुनवाई होती है, पीड़ित और आरोपी पक्ष के लोग बाकायदा जिरह करते हैं। सबूतों और गवाहों को हाजिर नाजिर मानकर फैसले सुनाए जाते हैं। यहां के न्यायाधीश खुद राजा भैया होते हैं। 3 दशक में राजा भैया की अदालत में दिए गए फैसलों को कभी किसी ने चुनौती नहीं दी। इसको आप खौफ या सम्मान किसी से भी जोड़कर देख सकते हैं.. लेकिन कुंडा की यही हकीकत है।राजा भैया की शख्सियत को कुछ इस तरह से समझिए कि वो सातवीं बार कुंडा से विधायक बने हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में वो जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) से विधायक चुने गए हैं। राजा और रजवाड़ों का दौर भले ही खत्म हो गया। कुंडा में लेकिन राजा भैया की ही सरकार चलती है। वह बाकी विधायकों की तरह जनता की समस्याओं को सुनकर सरकार तक नहीं पहुंचाते हैं। खुद ही सुलझाते हैं।यहां सास-बहू का झगड़ा हो या पारिवारिक जमीन विवाद। किसी पर जानलेवा हमला हो या दो पक्षों की मारपीट। किसी भी तरह का केस खुद राजा भैया ही सुनते हैं। सुनवाई के बाद फैसला सुनाते हैं।अगर राजा भैया बेंती महल में हैं तो उनका दरबार हर रोज लगता है। अगर वो कुंडा से बाहर हैं तो सप्ताह में दो बार लगता है। — चुनाव की आचार संहिता में जनता दरबार पर भले ही रोक लगाई गई थी। लेकिन कुंडा के बेंती दरबार में लोगों की सुनवाई कभी नहीं रूकी।इस दरबार में सिर्फ राजा भैया हैं और जनता है.. बीच में कोई नहीं इस दरबार को देखने के लिए बेंती महल पहुंची। समय था सुबह के दस बजे..। घड़ी की टिक-टिक के साथ यहां लोगों का जमावड़ा बढ़ता ही रहा। पहले 200 से 300 लोग वहां थे। ये कुछ देर में ही बढ़ते ही चले गए।इस दरबार में रखी लकड़ी की कुर्सी-टेबल के आस-पास से लेकर बेंती महल के पूरे परिसर में हर तरफ सिर्फ याचकों की भीड़ ही दिखाई पड़ रही थी। हर किसी को इंतज़ार था राजा भैया के दरबार में आने और न्याय प्रक्रिया शुरू करने का। दोपहर करीब 12 बजे एक शंखनाद हुआ। यह संकेत था कि राजा भैया पूजा खत्म करके दरबार में आ रहे हैं। उनके बाहर निकलते ही शंखनाद शुरू हुआ। राजा भैया के जयकारे लगने लगे।चूंकि एक दिन पहले ही राजा भैया सातवीं बार विधायकी का चुनाव जीते थे। इसलिए उनके आते ही करीब 3 घंटे तक उन्हें बधाई देने का सिलसिला चला। बधाई देने वाले खुद-ब-खुद कतार में लग गए। राजा भैया ने बच्चे से लेकर बूढ़े तक हर किसी से मुलाकात की। जो मजबूर, गरीब दिखा उसे जेब से निकाल नोटों की गड्डी दे दी।कोई फूल कोई देवी-देवता की मूर्ति ले आयालोग गुलाब के फूलों का हार, फल, देवी-देवताओं की मूर्तियां पता नहीं क्या-क्या लेकर आए अपने नेता के लिए। राजा भैया ने किसी के हाथ को अपने हाथ में थाम लिया। किसी को गले लगाया तो किसी को हाथ जोड़कर धन्यवाद किया। बधाई और मेल मिलाप के इस सिलसिले के बाद रात करीब 7 बजे तक दरबार का काम चलता रहा।यहां सरकारी अधिकारी केस लटकाते नहीं, वरना जवाब राजा भैया को देना पड़ता है..बेंती दरबार में जनता जो शिकायतें और समस्याएं लेकर आती है। उसका समाधान करने के लिए राजा भैया के पास खुद की फौज है। इसे यूथ बिग्रेड कहा जाता है। राजा भैजा तक जो मामले पहुंचते हैं, उन्हें इसी यूथ बिग्रेड के लोग कागजों में केस के तौर पर दर्ज करते हैं। वही पीड़ित और आरोपी पक्ष के लोगों को राजा भैया के सामने पेश करते हैं। मामला आपसी विवाद या मारपीट का है, तो मौके पर ही फैसला लिया जाता है।अगर मामला सरकारी विभागों से जुड़ा होता है, तो उसे राजा भैया के करीबी विधायक, ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य, पुलिस और राजस्व अधिकारियों के पास जांच के लिए भेजा जाता है। इसका फॉलोअप यूथ बिग्रेड करती है और रिपोर्ट राजा भैया को दी जाती है। सरकारी विभागों में यह केस लटकाए नहीं बल्कि तुरंत आगे बढ़ाए जाते हैं। क्योंकि नहीं बढ़ाते तो उन्हें भी राजा भैया को जवाब देना पड़ेगा।तानाशाही के आरोप लगे, जनता ने नकारेप्रतापगढ़ जिले के कुंडा, बेंती और आसपास के पूरे इलाके के लोग राजा भैया को ही अपनी सरकार मानते हैं। लेकिन सरकार में बैठे लोगों को कई बार ये रास नहीं आता है। नतीजतन उन पर तानाशाही के आरोप लगे। मायावती की सरकार में तो इसी बात को लेकर उन्हें जेल तक भेजा गया। लेकिन जनता ने तानाशाही के इन आरोपों को सिरे से नकार दिया
उत्तर प्रदेश -सबूतों और गवाहों को हाजिर नाजिर मानकर फैसले , यहां के न्यायाधीश खुद अलग जांच टीम

