इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में राज्य सरकार की तरफ से पैरवी के लिए तैनात वकीलों को सचिवालय बुलाकर विधि व न्याय विभाग में पूछताछ करने का मामला कोर्ट पहुंच गया। इससे सरकारी वकीलों में हड़कंप मच गया। अवध बार एसोसिएशन के महासचिव ने इस मामले की खबरों का हवाला देकर न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ के समक्ष गुहार की कि इससे वकीलों की गरिमा को ठेस पहुंची है।मामले में आदेश पर राज्य सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता जय कृष्ण सिन्हा दोपहर बाद खंडपीठ के समक्ष पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि सचिवालय में सरकारी वकीलों (वादधारकों) से हो रही पूछताछ की उन्हें जानकारी नहीं दी गई है। वह पता करके बता सकते हैं। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई।उधर, मामला उठाने वाले अवध बार के महासचिव अमरेंद्र नाथ त्रिपाठी ने कहा कि वकीलों को सचिवालय बुलाकर उनकी योग्यता की जांच नहीं की जा सकती है। फिलहाल अदालत ने मामले में अभी कोई आदेश पारित नहीं किया है। वहीं, बुधवार को भी कई वादधारकों को सचिवालय बुलाकर उनकी स्क्रीनिंग करने की चर्चा से ज्यादातर सरकारी वकील बेचैन दिखे।सरकारी वकीलों की चल रही स्क्रीनिंगचर्चा है कि विधि एवं न्याय विभाग में लंबे समय से जमे वकीलों को लेकर सीएम सख्त हैं। इसी कारण विभाग में सुधार और अयोग्य वकीलों को हटाने के लिए स्क्रीनिंग शुरू की गई है। सरकारी वकीलों की नियुक्ति उनके परफॉर्मेंस के आधार पर होगी। यह विभाग में बड़े बदलाव के संकेत हैं। वहीं, यह भी चर्चा है कि कई सरकारी वकील कोर्ट नहीं आते हैं। ऐसे में उनकी ओर से जवाबी हलफनामा समय से दाखिल नहीं किए जा रहे हैं। नतीजतन सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को कोर्ट में तलब किया जा रहा है। इससे सरकारी की छवि धूमिल हो रही है।वादधारकों का चल रहा इंटरव्यूवहीं, यह भी चर्चा है कि सरकार को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि सरकारी वकीलों और वादधारकों का काम ठीक नहीं है। इसलिए न्याय विभाग ऐसे वादधारकों का इंटरव्यू लेकर उनको परखने की कोशिश कर रहा है। इतना ही नहीं, वादधारकों की नियुक्ति किसके जरिए हुई, इस बारे में भी सवाल पूछे जा रहे हैं।मुख्य स्थायी अधिवक्ता-4 को हटायाप्रदेश में नई सरकार बनने के बाद सरकारी वकीलों को लगातार हटाने के सिलसिला जारी है। बुधवार को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में तैनात मुख्य स्थायी अधिवक्ता-4 भईयालाल वर्मा को राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। इससे पहले मंगलवार को भी दो सरकारी वकीलों को हटाया जा चुका है।
लखनऊ – वकीलों की छंटनी की चर्चा से मचा हड़कंप, कोर्ट ने फिलहाल नहीं पारित किया है कोई आदेश

