सचिवालय में विभिन्न पदों पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर करोड़ों वसूलने वाले गिरोह के सरगना दिलीप राय बलवानी को एसटीएफ ने रविवार को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ विभूतिखंड कोतवाली में मुकदमा दर्ज था। दिलीप राय इससे पहले भी जेल जा चुका है। उसके साथ इस करतूत में शामिल भाई मंजीत की तलाश की जा रही है। दिलीप के पास सचिवालय के 11 फर्जी नियुक्ति पत्र, लग्जरी गाड़ी व मोबाइल फोन बरामद हुये हैं।एसटीएफ के डिप्टी एसपी धर्मेश कुमार शाही के मुताबिक सरगना दिलीप राय बलवानी मूल रूप से जौनपुर के सिकरारा, डेमरूआ का रहने वाला है। दिलीप के खिलाफ कई लोगों ने शिकायत दर्ज करायी थी कि वह जेल से छूटने के बाद फिर लोगों को नौकरी दिलाने के नाम पर ठगने लगा है। इस पर ही डिप्टी एसपी धर्मेंश व इंस्पेक्टर अतुल चतुर्वेदी ने सर्विलांस की मदद से दिलीप की तलाश शुरू कर दी थी। रविवार को दिलीप राय डिकेथनॉल के पास मौजूद था। इस बारे में पता लगते ही एसटीएफ ने उसे वहां से गिरफ्तार कर लिया।भाई बनाता था फर्जी नियुक्ति पत्रएसटीएफ के मुताबिक दिलीप राय ने बताया कि फर्जी नियुक्ति पत्र उसका भाई मंजीत तैयार करता है। मंजीत ही जाल में फंसे लोगों से रुपये वसूलता है। जब लोग ज्यादा दबाव बनाने लगते हैं तो वह उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र थमा देता था। इस मामले में दोनों लोग पहले भी जेल जा चुके हैं।बड़े लोगों के साथ फोटो बनवाता थादिलीप राय ने खुलासा किया कि वह लोगों को रौब में लेने के लिये कई बड़े अफसरों व मंत्रियों के साथ अपनी फोटो जाल में फंसे लोगों को दिखाता था। यह सारी फोटो असली नहीं होती थी बल्कि वह मिक्सिंग कर बड़े लोगों के साथ अपनी फोटो प्रिन्ट करा लेता था।इन लोगों से वसूले थे रुपयेबलिया के मुक्तेश्वर सिंह से 16 लाख रुपये, वाराणसी के परमेन्द्र सिंह से 17 लाख, लखीमपुरखीरी के उपेन्द्र सिंह से पांच लाख, आजमगढ़ के सुरेन्द्र यादव से 18 लाख, लखनऊ के प्रमोद सिंह से साढ़े पांच लाख रुपये वसूले थे। इसके अलावा भी सैकड़ों लोगों को अपना शिकार बना चुका है। दिलीप के खिलाफ लखनऊ के वजीरगंज, गोमतीनगर, विभूतिखंड के अलावा उरई, बांदा व अन्य जिलों में कई मुकदमे दर्ज हैं।
लखनऊ -करोड़ों वसूलने वाला सरगना गिरफ्तार

