ज्ञानवापी प्रकरण में शृंगार गौरी और अन्य विग्रहों के सर्वे के लिए नियुक्त कोर्ट कमिश्नर को बदलने की अपील पर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन भी सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की पौने दो घंटे तक चली जिरह के बाद अदालत ने बुधवार को भी बहस जारी करने का आदेश दिया है। गहमागहमी भरे माहौल में अदालती कार्यवाही के दौरान कचहरी परिसर पुलिस छावनी में तब्दील रहा। संबंधित कोर्ट से लेकर पूरे परिसर में भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात थे। ज्ञानवापी प्रकरण में विपक्षी अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने गत सात मई को सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रवि कुमार की अदालत से कोर्ट कमिश्नर बदलने की मांग की है। अंजुमन की याचिका पर सोमवार को भी सुनवाई हुई थी। अदालत में उसे मंगलवार तक टाल दी थी। मंगलवार को दोपहर दो बजे सुनवाई शुरू हुई जो 1 घंटा 47 मिनट तक चली।इस दौरान विपक्षी अधिवक्ता अभयनाथ यादव और रईस अहमद ने कोर्ट में मुख्य रूप से यह दलील दी कि जिन शृंगार गौरी व अन्य विग्रहों का सर्वे शुरू हुआ है, वे अदृश्य देवता हैं। उन्हें कोर्ट कमिश्नर मस्जिद में क्यों खोज रहे हैं। वहीं, वादी पक्ष के अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी ने तर्क दिया कि सर्वे से ही पता चलेगा कि अंदर मस्जिद है या मंदिर और शृंगार गौरी के अलावा दूसरे विग्रह हैं या नहीं। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि सर्वे में मंदिर के प्रमाण नहीं मिले तो मैं अदालत से बाहर हो जाऊंगा। विपक्षी अधिवक्ता बोले, मैं तो जज में भगवान देखता हूंज्ञानवापी प्रकरण में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में चल रही सुनवाई के दौरान मंगलवार को विपक्षी अधिवक्ता अभयनाथ यादव और रईस अहमद ने दलील दी कि किसी आर्डिनरी कोर्ट कमिश्नर को आंखों से देखने के सिवाय कुछ भी करने का अधिकार नहीं है जबकि कमिश्नर के दो सहयोगी सर्वे के दौरान साक्ष्यों को अंगुलियों से कुरेद रहे थे।उन्होंने यह भी कहा कि कमीशन की कार्यवाही मस्जिद नहीं, शृंगार गौरी समेत अन्य विग्रहों की स्थिति जानने के लिए हो रही है। हम अदृश्य विग्रहों के सर्वे की बात कह रहे हैं। जो दिख नहीं रहा है, उसे कोर्ट कमिश्नर मस्जिद में क्यों खोज रहे हैं? अभयनाथ यादव ने कहा कि मैं तो जज में जिंदा भगवान देखता हूं। यह कोर्ट मेरे लिए मंदिर है।वादी पक्ष की दलील: सर्वे से ही मंदिर-मस्जिद का पता चलेगावादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी ने विपक्षी पर कोर्ट की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हमारी अपील पर सर्वे के लिए कोर्ट ने 26 अप्रैल को आदेश जारी किया है। मस्जिद के तहखाना में कई विग्रह हैं, यह स्थिति सर्वे से ही स्पष्ट होगी। उन्होंने कहा कि विपक्षी जिसे मस्जिद कहते हैं, उसे मैं मंदिर कह रहा हूं। सर्वे से ही पता चलेगा कि उक्त भवन मंदिर है या मस्जिद।सर्वे में वह मंदिर न मिले तो मैं अदालत से बाहर हो जाऊंगा। अधिवक्ता ने आग्रह किया कि अदालत जिला प्रशासन को मस्जिद के तहखाने का ताला खुलवा कर प्रवेश और सर्वे कराने की आदेश दे। वादी अधिवक्ता ने कहा कि यदि विपक्षी को कोर्ट कमिश्नर की कार्यवाही पर विश्वास नहीं है तो अदालत खुद मौके पर चले और कमीशन की कार्यवाही पूरी कराए। उन्होंने कोर्ट से कमिश्नर की कार्यवाही जारी रखने का आदेश देने का भी आग्रह किया। जांच के बाद ही अदालत भवन में प्रवेशसिविल जज की अदालत में सुनवाई शुरू होने से पहले जिला एवं सत्र न्यायालय के मुख्य भवन समेत पूरा परिसर पुलिस छावनी में तब्दील हो गया था। एडीसीपी वरुणा प्रबल प्रताप सिंह के नेतृत्व में कैंट, शिवपुर और लालपुर थाने की फोर्स सजग थी। ऊपरी तल पर स्थित सिविल जज कोर्ट के चारों ओर पुलिस तैनात थी। जांच के बाद मुख्य भवन में केवल अधिवक्ताओं को जाने दिया गया। मीडिया व अन्य वादकारियों को दूर रखा गया था।
वाराणसी -दोनो पक्षों की पौने दो घंटे चली बहस, कल भी रहेगी जारी

