लखनऊ। जब हम छोटे होते हैं तो मां बाप हमें पहला कदम चलने में मदद करते हैं और खुशी खुशी पाल कर बड़ा करते हैं। वहीं मां बाप जब बूढ़े होते हैं तो उनके आखिरी कदमों को हम सहारा नहीं देते हैं जबकि उस समय उन्हें सिर्फ हमारी यानी अपने बच्चों की जरूरत होती है। ऐसा ही संदेश नाटक आखिरी बसंत ने दिया। भारतीय सांस्कृतिक सम्बंध परिषद की ओर से शुक्रवार को नाटक का मंचन किया गया। क्षितिज शृंखला के तहत इस नाटक को दर्पण की ओर से स्वर्गीय उर्मिल कुमार थपलियाल को समर्पित किया गया।नाटक में वरिष्ठ रंगकर्मी डा. अनिल रस्तोगी ने सुधीर का किरदार शानदार ढंग से निभाया। शुभदीप राहा के लिखे और निर्देशित नाटक में चित्रा मोहन, अलका विवेक, विकास श्रीवास्तव, संजय और वंश आदि ने अभिनय किया
लखनऊ -मनाने में गुजर गई जिंदगी

