लखनऊ -टीले वाली मस्जिद में कमीशन कार्यवाही के लिए निचली अदालत में आवेदन करें पक्षकार: कोर्ट

by | Jun 1, 2022 | अपराध, ई पेपर, जनहित, नेशनल, बड़ी खबर, राजनीती, स्थापना और प्रेरणा | 0 comments

हिंदू पक्षकारों की ओर से टीले वाली मस्जिद में कमीशन कार्रवाई कराने के अनुरोध वाली अर्जी का निस्तारण करते हुए अपर जिला जज कल्पना ने कहा है कि याचीगण कमीशन कार्रवाई कराने संबंधी प्रार्थना पत्र मूल वाद का क्षेत्राधिकार रखने वाले अवर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं।कोर्ट ने आदेश में कहा है कि यह सिविल निगरानी इस न्यायालय के समक्ष निचली अदालत के 25 सितंबर 2017 के आदेश के विरुद्ध दाखिल की गई है। आदेश में कहा गया है कि मूल वाद अभी भी निचली अदालत में विचाराधीन है, निगरानी निस्तारण के दौरान इस अदालत को मात्र निगरानी के संदर्भ में विधिक बिंदुओं, आदेश की वैधानिकता के संबंध में निर्णय लेना है। आदेश में कहा गया है कि कमीशन का जहां तक प्रश्न है, इस संदर्भ में उल्लेखनीय है कि कमीशन जारी करना या अधिवक्ता कमिश्नर की नियुक्त करने के संबंध में इस अदालत को मूल वाद के लंबित रहने के दौरान क्षेत्राधिकार प्राप्त नहीं है। आदेश में यह भी कहा गया है कि यह प्रार्थना पत्र मूल वाद का क्षेत्राधिकार रखने वाली निचली अदालत के समक्ष पेश किया जाना न्याय संगत होगा।कोर्ट ने लंबित सिविल निगरानी में आगामी दो जुलाई की तिथि तय करते हुए कहा है कि बिना किसी स्थगन निगरानी में बहस के लिए पक्षकार आवश्यक रूप से नियत तिथि को उपस्थित हों। सुनवाई के दौरान हिंदू पक्षकारों की ओर से कहा गया था कि नागेश टीलेश्वर महादेव मंदिर की मूर्तियां नष्ट की जा रही हैं और उसका स्वरूप बदला जा रहा है। लिहाजा कमीशन नियुक्त कर सर्वे कराया जाए। इस पर राज्य सरकार की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता( दीवानी) ने कहा कि यदि अदालत विवादित स्थल का सर्वे कराने का कोई आदेश पारित करती है तब ऐसी स्थिति में सरकार अदालत के आदेश का पालन करेगी। अपर जिला जज कल्पना की अदालत में गोमती नदी किनारे लक्ष्मण टीला स्थित लॉर्ड शेष नागेश टीलेश्वर महादेव मंदिर में पूजा अर्चना एवं मालिकाना हक दिलाए जाने को लेकर निचली अदालत के आदेश के विरुद्ध दाखिल सिविल निगरानी दायर की गई है। पत्रावली के अनुसार वर्ष 2013 में लार्ड शेष नागेश टीलेश्वर महादेव की ओर से सिविल जज (जूनियर डिविजन) साउथ लखनऊ की अदालत में नियमित वाद दायर किया गया था। इसमें यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य पक्षकार बनाए गए थे। इसी वाद में अदालत से अनुरोध किया गया था कि टीले वाली मस्जिद के अंदर लॉर्ड शेष नागेश का मंदिर है, जिसको नुकसान पहुंचाया गया है। इस टीले वाले स्थान का मालिकाना हक दिलाने और पूजा अर्चना की अनुमति देने को कहा गया था। इस नियमित वाद के विरुद्ध आपत्ति दाखिल की गई थी कि वाद काल बाधित है। इस पर सिविल जज साउथ की अदालत ने 25 सितंबर 2017 को आदेश पारित कर कहा कि पक्षकारों को सुनने के बाद, मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार संपूर्ण वाद निरस्त नहीं किया जा सकता। इस आदेश के खिलाफ मौलाना सैयद शाह फजलुरहमान की ओर से मौलाना काजी सैयद शाह फजलुर मन्नान द्वारा जिला जज की अदालत में 11 अक्टूबर 2017 को सिविल निगरानी याचिका दाखिल की गई। जिसे अदालत ने विचारार्थ स्वीकार कर पक्षकारों को नोटिस जारी किया था। सिविल निगरानी याचिका में लार्ड शेष नागेश टीलेश्वर महादेव, लक्ष्मण टीला शेषनाग तीर्थ भूमि स्थान, वीके श्रीवास्तव और नौ अन्य को पक्षकार बनाते हुए पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग, प्रमुख सचिव, जिलाधिकारी, पुलिस महानिदेशक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी), थाना प्रभारी चौक एवं सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को पक्षकार बनाया गया है। इस प्रकरण में अदालत से विवादित स्थल का सर्वे कराए जाने का भी अनुरोध किया गया है।