प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर टीबी मरीजों का इलाज तो कर रहे हैं लेकिन मरीजों की जानकारी छिपा रहे हैं। टीबी मरीजों का आंकड़ा निक्षय पोर्टल पर दर्ज नहीं कर रहे हैं। जिला क्षय रोग अधिकारी को भी मरीजों की जानकारी नहीं दे रहे हैं। इससे मरीजों की सही आंकड़ा नहीं जुट पा रहा है। मरीजों को सरकारी योजना का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। अब स्वास्थ्य विभाग ने मनमानी करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई का फैसला किया है। कई 20 से अधिक अस्पतालों को नोटिस भी जारी की गई है।जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. कैलाश बाबू के मुताबिक लखनऊ में 1786 निजी डॉक्टर, नर्सिंग होम और पैथालाजी सेंटर में पंजीकृत हैं। इनमें महज 400 से कम डॉक्टर व पैथालाजी ही विभाग को टीबी मरीजों की जानकारी दे रहे हैं। बहुत से डॉक्टर तो साल में एक-दो मरीजों की जानकारी दे रहे हैं। इससे विभाग की सभी मरीजों को कवर करने की मंशा पूरी नहीं हो पा रही है।2021 में पहली तिमाही में प्राइवेट सेंटर ने 2596 मरीज की जानकारी दी थी। जो 2022 में घटकर 1315 रह गए हैं। उन्होंने बताया कि किसी सरकारी कार्यक्रम में बाधा पहुंचाना गलत है। प्राइवेट डाक्टरों को इस पर ध्यान देना होगा। केंन्द्र सरकार के गजट टीबी नोटिफिकेशन के अंतर्गत प्रत्येक केमिस्ट एंव ड्रगिस्ट को भी शेड्यूल एच 1 के तहत टीबी मरीज का ब्योरा रखना होगा। जिला टीबी केन्द्र को बताना होगा। उन्होंने बताया कि यदि डॉक्टरों ने जल्द ही टीबी मरीजों की जानकारी देनी शुरू नहीं की तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मरीजों की जानकारी न होने से उन्हें 500 रुपए प्रति माह के हिसाब से इंसेंटिव नहीं मिल पा रहा है।
लखनऊ -डॉक्टर टीबी मरीजों का इलाज तो कर रहे हैं लेकिन मरीजों की जानकारी छिपा रहे हैं

