लापरवाही एवं त्रुटिपूर्ण विवेचना के कारण पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश अरविंद मिश्रा ने अपचारी की जमानत को स्वीकार करते हुए विवेचक एवं सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) के विरुद्ध कार्रवाई के लिए अपर मुख्य सचिव (गृह), पुलिस महानिदेशक एवं पुलिस आयुक्त को पत्र के साथ आदेश की प्रति भेजे जाने का आदेश दिया है।मोहनलालगंज थाने से संबंधित एवं 31 जनवरी 2022 से किशोर ग्रहण में निरुद्ध अप्राकृतिक दुष्कर्म से संबंधित अपचारी की जमानत अर्जी पर सुनवाई के समय अदालत ने पाया कि 13 वर्षीय पीड़ित का विवेचक ने बयान दर्ज नहीं कराया। इसके अलावा 30 जनवरी 2022 की घटना से संबंधित पीड़ित बालक का नमूना जांच 8 फरवरी 2022 को विवेचक द्वारा विधि विज्ञान प्रयोगशाला विलंब से भेजा गया है। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में विलंब से संकलित किए गए नमूने में घटना के संबंध में कोई भी सहायक साक्ष्य प्राप्त करने की संभावना नगण्य हो जाती है।अदालत ने जमानत आदेश में कहा है कि मामले में आरोप पत्र प्राप्त हो चुका है तथा विवेचना में हस्तक्षेप की संभावना नहीं है। लिहाजा गुण दोष के आधार पर अपचारी को जमानत पर रिहा किया जाता है। अदालत विवेक के विरुद्ध टिप्पणी करते हुए कहा है कि विवेचक के इस आचरण से अभियुक्त को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिला है। लिहाजा विवेचक प्रभात कुमार दीक्षित के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई हेतु आदेश की एक प्रति पुलिस आयुक्त को भेजी जाए। अदालत ने सहायक पुलिस आयुक्त ने ठीक से पर्यवेक्षण नहीं किया। इनके विरुद्ध भी आवश्यक कार्यवाई किए जाने के लिए आदेश की प्रति पुलिस आयुक्त को भेजे जाने का आदेश दिया है। साथ ही आदेश की प्रति पुलिस महानिदेशक एवं अपर मुख्य सचिव (गृह) को भी भेजे जाने का आदेश दिया है।जमानत आवेदन पर सुनवाई के समय अदालत में मौजूद विशेष लोक अभियोजक सुखेंद्र प्रताप सिंह ने इस तथ्य को स्वीकार किया कि विवेचक द्वारा विवेचना में घोर लापरवाही बरती गई है तथा पीड़ित बालक का कलम बंद बयान कराए बिना अदालत में आरोप पत्र पेश किया गयाहै। इसके अलावा विधि विज्ञान प्रयोगशाला को परीक्षण साक्ष्य विलंब से भेजा गया है।(अपहरणकर्ता की जमानत खारिज)
। एकतरफा प्यार में असफल होने पर शादी का दबाव बनाने के लिए प्रेमिका के सात वर्षीय भाई का अपहरण करने के आरोपी सोहन गौतम की जमानत अर्जी को अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमती कल्पना ने खारिज कर दिया है।अदालत के समक्ष जमानत अर्जी का विरोध करते हुए सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता दुष्यंत मिश्रा एवं अरुण पांडे का तर्क था कि इस मामले की रिपोर्ट वादी कमलेश ने इटौंजा थाने में 26 अप्रैल 2019 को दर्ज कराई थी। जिसमें कहा गया था कि आरोपी सोहन गौतम वादी के घर आता जाता था तथा 25 अप्रैल 2019 को भी वह घर आया था तथा बाजार जाने को कह कर उसके 7 वर्षीय बेटे सत्यम को भी साथ ले गया। लेकिन जब देर तक नहीं लौटा तो सब लोग परेशान होने लगेबहस के दौरान यह भी कहा गया कि वादी ने अपनी बड़ी बेटी से फोन लगाने को कहा जिसके जवाब में बड्डूपुर में संकटा देवी मंदिर में मिलने को कह कर फोन काट दिया। विवेचना के दौरान पता चला कि अभियुक्त वादी की लड़की से शादी करना चाहता था। परंतु इसके लिए न तो वादी तैयार था और नहीं लड़की। कहा गया है कि शादी का दबाव बनाने के लिए अभियुक्त ने सत्यम का अपहरण किया था। पुलिस ने जब सत्यम की बरामदगी की तब उसके चेहरे एवं आंख पर चोट के निशान थे। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया है।

